इजराइल-लेबनान सीमा पर खूनी संघर्ष जारी: युद्धविराम के बीच भी बरस रहे गोले, अब तक 2496 लोगों की मौत, 7725 घायल

Edited By Updated: 25 Apr, 2026 10:23 PM

bloody conflict continues on the israel lebanon border

इजराइल और लेबनान के बीच 'ब्लू लाइन' पर तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने पर सहमति तो बनी है, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। लेबनान के स्वास्थ्य...

बेरूत/यरूशलेम: इजराइल और लेबनान के बीच 'ब्लू लाइन' पर तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने पर सहमति तो बनी है, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च को शुरू हुए इजराइली सैन्य अभियान के बाद से अब तक 10,000 से अधिक नागरिक मारे गए या घायल हो चुके हैं, जिसमें 2,496 लोगों की मौत और 7,725 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है।

शनिवार को दहला दक्षिण लेबनान
इजराइली लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने शनिवार को दक्षिण लेबनान के कूनिन और सफद अल-बत्तख जैसे इलाकों को निशाना बनाया। नबातियेह जिले के योहोर अल-शकीफ में इजराइली हमले में चार लोगों की जान चली गई। इसके अलावा, इजराइली सेना ने मरजयून जिले के अल-कंतारा और अल-कुसैर के साथ-साथ टायर (Tyre) के पास वादी हसन और हुला कस्बे में भी भारी गोलाबारी की। इजराइली सेना का दावा है कि उन्होंने लितानी क्षेत्र में हिजबुल्लाह के दो लड़ाकों को मार गिराया है।

हिजबुल्लाह का पलटवार
दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने भी इजराइली ठिकानों पर रॉकेटों और ड्रोनों से हमला बोला है। संगठन ने दावा किया है कि उसने अल-कंतारा में इजराइली सैन्य वाहन 'नमेरा' (Namera) को एक आत्मघाती ड्रोन से सफलतापूर्वक निशाना बनाया। उत्तरी इजराइल की ओर दागे गए कई रॉकेटों को इजराइली रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया।

12 लाख लोग बेघर, बढ़ता मानवीय संकट
जारी हमलों और निकासी के आदेशों के कारण लेबनान में अब तक करीब 12 लाख लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन कर चुके हैं। इजराइली सेना अभी भी दक्षिण लेबनान के कई गांवों में इमारतों को गिराने का काम जारी रखे हुए है और निवासियों को लितानी नदी क्षेत्र की ओर न लौटने की चेतावनी दे रही है। शुक्रवार का दिन युद्धविराम विस्तार के बाद सबसे घातक रहा, जिसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई।

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