Edited By Pardeep,Updated: 25 Apr, 2026 11:25 PM

बिहार के स्वास्थ्य विभाग की जमीनी हकीकत बयां करती एक शर्मनाक तस्वीर कटिहार के सदर अस्पताल से सामने आई है। जहां एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी के बीच सरकारी लापरवाही की इंतिहा देखने को मिली।
नेशनल डेस्क : बिहार के स्वास्थ्य विभाग की जमीनी हकीकत बयां करती एक शर्मनाक तस्वीर कटिहार के सदर अस्पताल से सामने आई है। जहां एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी के बीच सरकारी लापरवाही की इंतिहा देखने को मिली। यहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत 7 मासूम मरीजों और उनके 10 परिजनों को एक ही एम्बुलेंस में भेड़-बकरियों की तरह ठूंसकर अस्पताल लाया गया।
नियमों को ताक पर रखकर जान से खिलवाड़
सूत्रों के अनुसार, नियम यह है कि एक एम्बुलेंस में अधिकतम दो मरीज और उनके साथ दो परिजन ही हो सकते हैं। इसके अलावा RBSK के तहत बच्चों को लाने के लिए विशेष वाहनों का भी प्रावधान है। लेकिन आजमनगर उप स्वास्थ्य केंद्र से सदर अस्पताल तक के सफर में इन तमाम नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं। एक ही वाहन में कुल 17 लोगों को बिठाकर उनकी सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ किया गया।
अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला, एम्बुलेंस की कमी का दिया हवाला
मौके पर मौजूद डॉक्टर शकील अहमद ने बताया कि ये सभी बच्चे सुनने, बोलने या चलने में असमर्थ हैं और उन्हें इलाज के लिए लाया गया है। जब उनसे एक ही एम्बुलेंस में इतनी भीड़ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने एम्बुलेंस की कमी का रोना रोया। उन्होंने दावा किया कि यह कदम जिला समन्वयक प्रशांत झा के निर्देश और डीसी साहब की अनुमति पर उठाया गया था।
जांच के आदेश, पर सवाल बरकरार
मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला अधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में एम्बुलेंस और विशेष वाहनों की कमी नहीं थी, तो मासूमों को इस तरह प्रताड़ित क्यों किया गया? यह घटना साफ करती है कि कागजों पर चमकती व्यवस्था असल में दम तोड़ रही है।