CCP पर बड़ा हमला, ताइपे समिट में चीन पर गंभीर आरोप, NED प्रमुख बोले- 20 साल से दुनिया की आज़ादी पर पड़ रहा असर

Edited By Updated: 08 Jul, 2026 06:25 PM

china is threat to democracy says ngo head

'नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी' (NED) के प्रेसिडेंट और CEO डेमन विल्सन ने कहा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। उनका कहना है कि चीन राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर अपने हितों के अनुरूप...

इंटरनेशनल डेस्क : 'नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी' (NED) के प्रेसिडेंट और CEO डेमन विल्सन ने कहा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। उनका कहना है कि चीन राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर अपने हितों के अनुरूप वैश्विक व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहा है, जिससे पिछले दो दशकों से दुनिया भर में लोकतांत्रिक आज़ादी और नागरिक अधिकारों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

CITW समिट में चीन की भूमिका पर उठे सवाल
ताइपे में आयोजित इस वर्ष के 'चाइना इन द वर्ल्ड' (CITW) समिट को संबोधित करते हुए डेमन विल्सन ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन का नकारात्मक प्रभाव वैश्विक आज़ादी, राजनीतिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं में लगातार 20 वर्षों से हो रही गिरावट का एक प्रमुख कारण रहा है। उन्होंने कहा कि ताइवान रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तानाशाही बनाम आज़ादी की लड़ाई की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।

ताइवान के अनुभव से सीखने का अवसर
विल्सन ने कहा कि इस वर्ष ताइपे में CITW समिट का आयोजन ताइवान के बहुमूल्य अनुभव से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि ताइवान में मजबूत ज्ञान नेटवर्क, विश्वास और सहयोग तंत्र विकसित कर दुनिया भर के लोकतांत्रिक देश अपनी संस्थागत मजबूती (Resilience) बढ़ा सकते हैं।

'सिर्फ सैन्य शक्ति नहीं, व्यापक मजबूती जरूरी'
कार्यक्रम में जर्मन मार्शल फंड के इंडो-पैसिफिक प्रोग्राम की मैनेजिंग डायरेक्टर बॉनी ग्लेज़र ने कहा कि चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए लोकतांत्रिक देशों को केवल सैन्य-केंद्रित प्रतिरोध (Deterrence) की सोच से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा, "प्रभावी और विश्वसनीय प्रतिरोध के लिए व्यापक सामाजिक और संस्थागत मजबूती (Comprehensive Resilience) आवश्यक है।"

ताइवान बना लोकतांत्रिक मजबूती का उदाहरण
ग्लेज़र ने कहा कि ताइवान लंबे समय से चीन की ओर से सैन्य धमकी, आर्थिक दबाव, राजनीतिक युद्ध और सूचनाओं में हेरफेर जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन दबावों को केवल सहने के बजाय ताइवान ने "लोकतांत्रिक मजबूती के व्यावहारिक मॉडल" विकसित किए हैं। सरकार और समाज ने मिलकर गलत सूचनाओं का मुकाबला करने, पारदर्शिता बढ़ाने और जनभागीदारी को मजबूत करने के प्रयास किए हैं।

ग्लेज़र ने कहा, "ताइवान लोकतांत्रिक मजबूती का एक जीवंत उदाहरण बन गया है।" उन्होंने कहा कि ताइवान का अनुभव केवल उसकी भौगोलिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि उसने उन चुनौतियों का बहुत पहले और व्यापक स्तर पर सामना किया है, जिनका सामना अब कई अन्य लोकतांत्रिक देश करना शुरू कर रहे हैं।

'लोकतंत्र अब ताइवान को समाधान के रूप में देख रहा है'
ग्लेज़र ने कहा, "दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देश अब ताइवान को केवल सुरक्षा चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि समाधान के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में भी देख रहे हैं।"

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