Edited By Rohini Oberoi,Updated: 03 Sep, 2026 09:29 AM

नेपाल-चीन सीमा पर अचानक आई बाढ़ में संपर्क व्यवस्था ध्वस्त होने और चौकियां बह जाने के बाद महाराष्ट्र के ठाणे जिले के 10 तीर्थयात्री अब भी लापता हैं। लापता लोगों के परिजन उनके बारे में कोई जानकारी मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और अधिकारियों...
ठाणे : नेपाल-चीन सीमा पर अचानक आई बाढ़ में संपर्क व्यवस्था ध्वस्त होने और चौकियां बह जाने के बाद महाराष्ट्र के ठाणे जिले के 10 तीर्थयात्री अब भी लापता हैं। लापता लोगों के परिजन उनके बारे में कोई जानकारी मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और अधिकारियों से जल्द कार्रवाई की अपील कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ये 10 तीर्थयात्री 26 अगस्त को तिमुरे चीनी आव्रजन चौकी के निकट बाढ़ आने के बाद से लापता हैं।
बाढ़ में स्थानीय संचार व्यवस्था पूरी तरह नष्ट हो गई है। जिले के डोंबिवली निवासी प्रकाश शांताराम माने और उनकी पत्नी प्रतिभा ही अब तक सुरक्षित घर लौट पाए हैं। लापता लोगों के परिजन बेहद चिंतित हैं। प्रभावित सीमा क्षेत्रों में करीब एक सप्ताह से संपर्क व्यवस्था ठप होने के कारण उन्हें अपने रिश्तेदारों की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।
लापता तीर्थयात्रियों में समीर मुकुंद जोशी और अपर्णा समीर जोशी (नौपाड़ा), सुनील सुदर्शन सुभेदार (डोंबिवली), संजय राजमल पाटिल और नलिनी संजय पाटिल (कल्याण पश्चिम), रजनीश रघुनाथ नातू (ठाणे पश्चिम), यशस भंड (नवी मुंबई) और अभिषेक घोने (कल्याण पश्चिम) शामिल हैं। इनके अलावा सतिश विनायक पाटणकर और उनकी पत्नी रेखा पाटणकर भी लापता हैं।
सतीश के भाई संजय पाटणकर ने बुधवार को कहा, बाढ़ आने के समय से ही हमारा उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। ठाणे जिला प्रशासन ने बताया कि वह लापता तीर्थयात्रियों का पता लगाने के लिए नेपाल में आपदा राहत दलों और यात्रा संचालकों के साथ समन्वय कर रहा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट हिमस्खलन के कारण 26 अगस्त को अचानक बाढ़ आई थी।
इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई शहर और गांव बुरी तरह प्रभावित हुए। अधिकारियों के अनुसार, इस भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो गई है लगभग 4,000 लोग अब भी लापता हैं जिनमें 583 विदेशी नागरिक और कई सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।