सावधान! ब्रश करते मसूड़ों से खून आए तो हो जाएं अलर्ट, बन सकता हार्ट अटैक की वजह, जानें कनैक्शन

Edited By Updated: 15 Jul, 2026 01:17 PM

gum disease and the connection to heart disease

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की स्टडी में पाया गया कि मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाला P. gingivalis बैक्टीरिया खून के जरिए दिल तक पहुंचकर हार्ट वॉल्व को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों ने नियमित ब्रश, फ्लॉस, समय पर डेंटल जांच और तंबाकू से दूरी बनाकर...

International Desk: अगर ब्रश करते समय आपके मसूड़ों से खून आता है या उनमें लगातार सूजन रहती है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाला बैक्टीरिया 'पॉर्फिरोमोनास जिंजिवैलिस (P. gingivalis)' खून के जरिए दिल तक पहुंचकर हार्ट वॉल्व को नुकसान पहुंचा सकता है।

 

कैसे पहुंचता है बैक्टीरिया दिल तक?
विशेषज्ञों के अनुसार, मसूड़ों में संक्रमण या खून आने पर P. gingivalis बैक्टीरिया रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद यह दिल के एओर्टिक वॉल्व तक पहुंचकर सूजन पैदा करता है और वहां कैल्शियम जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इससे वॉल्व धीरे-धीरे सख्त और संकरा होने लगता है, जिसे कैल्सिफिक एओर्टिक वॉल्व स्टेनोसिस (Calcific Aortic Valve Stenosis) कहा जाता है। एओर्टिक वॉल्व दिल का वह मुख्य वाल्व है, जिससे ऑक्सीजन युक्त खून पूरे शरीर में पहुंचता है। जब इस पर कैल्शियम की परत जम जाती है तो वॉल्व ठीक से खुल नहीं पाता।

 

इसका परिणाम यह होता है कि 

  • दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
  • हृदय की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।
  • लंबे समय में हार्ट फेल होने या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
  • धीरे-धीरे दिखते हैं लक्षण

विशेषज्ञों के मुताबिक शुरुआती चरण में इस बीमारी के लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन समय के साथ मरीज में ये समस्याएं दिखाई देने लगती हैं 

  • जल्दी थकान होना
  • सीने में दर्द
  • सांस फूलना
  • चक्कर आना
  • शारीरिक गतिविधि में परेशानी

कैसे करें बचाव?

  • विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी उपाय बताए हैं  
  • दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें।
  • दांतों के बीच सफाई के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का इस्तेमाल करें।
  • मसूड़ों से लगातार खून या सूजन होने पर तुरंत डेंटिस्ट से जांच कराएं।
  • धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह बचें।
  • मधुमेह के मरीज ब्लड शुगर नियंत्रित रखें।
  • भोजन में विटामिन C और कैल्शियम से भरपूर चीजें शामिल करें।


 अध्ययन के अनुसार, अभी ऐसी कोई दवा उपलब्ध नहीं है जो बढ़े हुए एओर्टिक वॉल्व स्टेनोसिस को पूरी तरह ठीक कर सके। इसलिए समय रहते मसूड़ों की बीमारी का इलाज और अच्छी ओरल हाइजीन ही सबसे प्रभावी बचाव है।
  
 

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