ईरान को रूस दे रहा अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सूचना? जेलेंस्की के दावे पर ट्रंप बोले- पुतिन से पूछूंगा

Edited By Updated: 28 Jul, 2026 06:07 AM

is russia giving iran information about us military bases

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की द्वारा रूस पर ईरान को खुफिया जानकारी देने के आरोपों पर ट्रंप ने कहा है कि वह इस बारे में सीधे रूसी राष्ट्रपति...

वाशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की द्वारा रूस पर ईरान को खुफिया जानकारी देने के आरोपों पर ट्रंप ने कहा है कि वह इस बारे में सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सवाल करेंगे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हम इस बात की तह तक जाएंगे कि क्या रूस वाकई ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट जानकारी मुहैया करा रहा है।

ईरान के पास कुछ नहीं, हमने उसे हराया: ट्रंप
जेलेंस्की के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर रूस ने ईरान की मदद की भी है, तो उसका कोई खास असर नहीं हुआ है। उन्होंने ईरान की सैन्य शक्ति पर तंज कसते हुए कहा कि उनके पास न तो प्रभावी सेना है, न एयर फोर्स और न ही नेवी। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को बुरी तरह हराया है, इसलिए रूसी मदद का कोई महत्व नहीं रह जाता।

नेतन्याहू और ट्रंप की अहम मुलाकात आज
इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आज वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान दोनों ने ही फिलहाल एक-दूसरे पर हमले रोक रखे हैं। नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि वह ईरान को कमजोर करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने के ट्रंप के प्रयासों का पुरजोर समर्थन करते हैं। इजराइली प्रधानमंत्री ने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान या उसके सहयोगियों ने दोबारा इजराइल पर हमला किया, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी।

बातचीत को मौका देना चाहते हैं ट्रंप
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल कूटनीति और बातचीत को थोड़ा और समय देना चाहते हैं। ओमान और अन्य मध्यस्थों के जरिए ईरान के साथ वरिष्ठ और तकनीकी स्तर पर लगातार संपर्क बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक इस सैन्य तनाव को झेलना न तो अमेरिका के लिए आसान है और न ही ईरान के लिए।

 

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