ईरान से जंग के बीच ट्रंप का बड़ा फैसला, इराक से पूरी तरह हटेगी अमेरिकी सेना

Edited By Updated: 15 Jul, 2026 12:06 PM

us troop withdrawal from iraq set for september 30

अमेरिका सितंबर 2026 के अंत तक इराक से अपनी पूरी सेना हटा लेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने इसकी घोषणा की। 2003 में शुरू हुआ अमेरिकी सैन्य अभियान लगभग 23 साल बाद समाप्त होगा। अब इराक की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी...

Washington: करीब 23 वर्षों तक चले सैन्य अभियान के बाद अमेरिका सितंबर 2026 के अंत तक इराक से अपनी पूरी सैन्य मौजूदगी समाप्त कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की। यह फैसला 2003 में सद्दाम हुसैन के शासन के खिलाफ शुरू हुए अमेरिकी सैन्य अभियान के अंत का प्रतीक माना जा रहा है। व्हाइट हाउस में मीडिया को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अब इराक में अमेरिकी सेना की स्थायी मौजूदगी की जरूरत नहीं रह गई है। उन्होंने कहा, "अब हमें नहीं लगता कि इराक में सेना रखने की आवश्यकता है। इराक के साथ हमारे संबंध अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार और निवेश तक विस्तारित हो चुके हैं।

 

जरूरत पड़ने पर हम इराक की मदद और सुरक्षा के लिए तैयार रहेंगे।" वहीं, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने कहा कि 30 सितंबर 2026 तक सभी अमेरिकी सैनिक इराक छोड़ देंगे, जबकि अमेरिकी कंपनियां इराक में निवेश और व्यापार जारी रखेंगी। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने भी बयान जारी कर बताया कि यह कदम 2024 में अमेरिका और इराक के बीच हुए समझौते के तहत उठाया जा रहा है। इस समझौते में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिकी सैन्य मिशन को समाप्त करने पर सहमति बनी थी। पेंटागन के अनुसार, पिछले दो वर्षों में अधिकांश अमेरिकी सैनिक पहले ही इराक से लौट चुके हैं और अब अंतिम चरण की वापसी पूरी की जाएगी।

 

ISIS के खिलाफ मिशन लगभग पूरा
हाल के वर्षों में इराक में अमेरिकी सेना की भूमिका काफी सीमित हो गई थी। अमेरिकी सैनिक मुख्य रूप से  इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ खुफिया और सीमित सैन्य अभियान, इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण, आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग तक सीमित थे। अब इराकी सेना और सुरक्षा बल अधिकांश अभियानों का नेतृत्व स्वयं कर रहे हैं। अमेरिका ने मार्च 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के नेतृत्व में इराक पर हमला किया था। इस अभियान को "शॉक एंड ऑ" (Shock and Awe) नाम दिया गया था, जिसमें व्यापक हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने बगदाद पर कब्जा कर लिया था। उस समय अमेरिका ने दावा किया था कि सद्दाम हुसैन के पास बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियार (Weapons of Mass Destruction - WMD) मौजूद हैं, लेकिन बाद में ऐसे हथियारों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।

    

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