Monthly Fees In Japan: जापान के सरकारी स्कूलों की मंथली फीस कितनी? जानें क्या भारत से भी सस्ती है पढ़ाई

Edited By Updated: 24 Feb, 2026 10:09 AM

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जापान को दुनिया के सबसे महंगे देशों में गिना जाता है लेकिन जब बात बच्चों के भविष्य और शिक्षा की आती है तो यहां का सिस्टम हैरान कर देता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि विकसित देशों में पढ़ाई का खर्च बजट से बाहर होगा लेकिन जापान ने अपनी शिक्षा नीति को इतना...

Monthly Fees In Japan : जापान को दुनिया के सबसे महंगे देशों में गिना जाता है लेकिन जब बात बच्चों के भविष्य और शिक्षा की आती है तो यहां का सिस्टम हैरान कर देता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि विकसित देशों में पढ़ाई का खर्च बजट से बाहर होगा लेकिन जापान ने अपनी शिक्षा नीति को इतना लचीला बनाया है कि वहां कई मायनों में पढ़ाई भारत के निजी स्कूलों से भी सस्ती पड़ती है। आइए जानते हैं क्या है जापान का एजुकेशन मॉडल।

15 साल की उम्र तक पढ़ाई है फ्री और अनिवार्य

जापान में स्कूली शिक्षा को मुख्य रूप से तीन चरणों में बांटा गया है:

  1. प्राथमिक स्कूल (Primary): 6 साल

  2. जूनियर हाई स्कूल (Junior High): 3 साल

  3. सीनियर हाई स्कूल (Senior High): 3 साल

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यहां 15 साल की उम्र तक शिक्षा हासिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। अच्छी बात यह है कि इस उम्र तक सरकारी स्कूलों में ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ होती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि पैसे की कमी किसी भी बच्चे की बुनियादी शिक्षा में बाधा न बने।

2025 का बड़ा बदलाव: अब हाई स्कूल भी हुआ मुफ्त

पहले जापान में 15 से 18 साल की उम्र (सीनियर हाई स्कूल) के लिए 5,000 से 10,000 येन प्रति माह की फीस ली जाती थी लेकिन साल 2025 से लागू हुए नए नियमों के बाद सरकारी हाई स्कूलों की ट्यूशन फीस को भी लगभग खत्म कर दिया गया है। यानी अब जापान में 12वीं तक की शिक्षा सरकार की ओर से लगभग निशुल्क दी जा रही है।

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बिना एग्जाम के पढ़ाई और खास नियम

जापान के स्कूलों का माहौल भारत से काफी अलग और दिलचस्प है:

  • नो एग्जाम प्रेशर: छोटे बच्चों के लिए वहां कोई सालाना बड़ी परीक्षा नहीं होती। सीखने पर जोर देने के लिए केवल 'वीकली टेस्ट' लिए जाते हैं।

  • यूनिफॉर्म का नियम: वहां डेली यूनिफॉर्म का बोझ नहीं है। छात्र सामान्य कपड़ों में स्कूल जाते हैं लेकिन फिजिकल एजुकेशन और लंच (खाना खाते समय) के लिए उन्हें स्कूल में ही विशेष सफेद कपड़े पहनने होते हैं।

  • टेक्नोलॉजी: बच्चों को किताबों के साथ-साथ सरकार की ओर से मुफ्त लैपटॉप या टैबलेट दिए जाते हैं ताकि वे डिजिटल रूप से अपडेट रह सकें।

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कितना आता है अतिरिक्त खर्च?

भले ही ट्यूशन फीस जीरो हो लेकिन अन्य गतिविधियों पर खर्च करना पड़ता है।

  • स्कूल ट्रिप, लंच, स्पोर्ट्स और स्कूल डेवलपमेंट के लिए माता-पिता को सालाना करीब 35,000 येन खर्च करने पड़ सकते हैं।

  • जिन परिवारों की आय कम है उन्हें स्थानीय प्रशासन आर्थिक सहायता (Subsidy) भी प्रदान करता है।

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भारत बनाम जापान: कौन है बेहतर?

भारत में भी सरकारी स्कूल मुफ्त शिक्षा और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं देते हैं। लेकिन जापान की खासियत वहां की क्वालिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर है। भारत में जहां मध्यम वर्ग के लोग अच्छी शिक्षा के लिए महंगे प्राइवेट स्कूलों की ओर भागते हैं वहीं जापान में सरकारी स्कूलों का स्तर इतना ऊंचा है कि लोग उन पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं।

 

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