अराघची से मुलाकात दौरान भावुक हुए पुतिन; ईरान की ‘हिम्मत’ को किया सलाम,कहा- ईरानी जनता बहुत “बहादुर”(Video)

Edited By Updated: 28 Apr, 2026 04:28 PM

putin praises iranian courage as tehran s foreign minister visits russia

रूस में Vladimir Putin और Abbas Araghchi की मुलाकात के बीच ईरान-यूएस तनाव कम करने की कोशिशें तेज हुई हैं। पाकिस्तान और ओमान मध्यस्थ बने हुए हैं, लेकिन होर्मुज संकट और अमेरिकी नाकेबंदी से शांति वार्ता अब भी अनिश्चित बनी हुई है।

International Desk: रूस की राजधानी मॉस्को में एक अहम कूटनीतिक हलचल देखने को मिली, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची  (Abbas Araghchi) राष्ट्रपति  व्लादिमीर पुतिन  (Vladimir Putin) से मुलाकात के लिए पहुंचे। इस दौरान पुतिन ने ईरानी जनता की “बहादुरी” की खुलकर तारीफ की और कहा कि वे अपनी संप्रभुता के लिए मजबूती से लड़ रहे हैं। अराघची ने कहा कि उनका यह दौरा रूस के साथ “करीबी समन्वय” बढ़ाने और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति पर चर्चा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस और ईरान मिलकर इस संकट का समाधान निकालने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। 8 अप्रैल को एक अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) हुआ था, लेकिन अब यह समझौता कई कारणों से कमजोर पड़ता दिख रहा है। सबसे बड़ा विवाद Strait of Hormuz को लेकर है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर सख्त नाकेबंदी कर रखी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। इसी वजह से ईरान ने साफ कहा है कि जब तक यह नाकेबंदी नहीं हटेगी, वह आगे की बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा।इस बीच पाकिस्तान और ओमान पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभा रहे हैं।

 

दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहे हैं। इस्लामाबाद में हुई हालिया बातचीत को “सकारात्मक” बताया गया है, और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द कोई बड़ा समझौता सामने आ सकता है। हालांकि, हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर दबाव बनाए रखा है और कहा है कि प्रस्ताव “पर्याप्त नहीं” है। वहीं, इजराइल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष भी इस पूरी स्थिति को और जटिल बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रूस की भूमिका निर्णायक हो सकती है, चाहे वह शांति समझौता हो या फिर संघर्ष का नया चरण। फिलहाल, दुनिया की नजरें मॉस्को में चल रही इस कूटनीति पर टिकी हैं, जहां से या तो शांति की राह निकलेगी या फिर टकराव और बढ़ सकता है।

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