Narasimha Jayanti 2026 Date & Muhurat: अधर्म के विनाश के लिए कब प्रकट होंगे भगवान नरसिंह? जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Edited By Updated: 28 Apr, 2026 01:29 PM

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Narasimha Jayanti 2026 Date & Muhurat: जानें साल 2026 में कब है नरसिंह चतुर्दशी? पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, तिथि और भगवान नरसिंह को प्रसन्न करने की सरल पूजा विधि।

Narasimha Jayanti 2026 Date & Muhurat: हिंदू धर्म में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह चतुर्दशी या नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभे को चीरकर 'नरसिंह' अवतार लिया था। वर्ष 2026 में इस महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में नरसिंह जयंती की सटीक तिथि और पूजा का सबसे उत्तम समय।

Narasimha Jayanti

Narasimha Jayanti 2026 Date & Muhurat: नरसिंह चतुर्दशी तिथि और शुभ मुहूर्त 2026
पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष चतुर्दशी तिथि का समय कुछ इस प्रकार रहेगा:
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: 29 अप्रैल 2026, शाम 07:51 बजे।
चतुर्दशी तिथि का समापन: 30 अप्रैल 2026, रात 09:12 बजे।
व्रत और उत्सव: उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, नरसिंह जयंती का व्रत और मुख्य उत्सव 30 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा।

पूजा के लिए केवल 2 घंटे 39 मिनट का समय
भगवान नरसिंह का प्राकट्य संध्या काल (सूर्यास्त के समय) हुआ था, इसलिए उनकी पूजा शाम के समय करना ही शास्त्र सम्मत और सर्वोत्तम माना जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 04:17 बजे से शाम 06:56 बजे तक।

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Narasimha Jayanti puja vidhi नरसिंह जयंती पूजा विधि: घर की पश्चिम दिशा में नीले कपड़े पर नरसिंह देव का चित्र स्थापित करके पंचोपचार पूजन करें। सरसों के तेल का दीपक करें, लोहबान धूप करें, बरगद के पत्ते चढ़ाएं, काजल चढ़ाएं, नारियल, बादाम व मिश्री चढ़ाएं, उड़द की खिचड़ी का भोग लगाएं व एक माला इस विशिष्ट मंत्र की जपें। पूजन के बाद भोग को पीपल के नीचे रख दें।
 
पूजा मंत्र: ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः॥

आध्यात्मिक महत्व
हमारे शास्त्र एवं पुराण प्रभु की महिमा से भरे पड़े हैं। जिनमें बताया गया है कि भगवान सदा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। जब भक्त किसी दुष्ट के सताए जाने पर सच्ची भावना से प्रभु को पुकारते हैं तो भगवान दौड़े चले आते हैं। भगवान तो भक्त वत्सल हैं जो सदा ही अपने भक्तों के आधीन रहते हैं। अनादि काल से ही जैसे-जैसे धरती पर दानवों ने देवताओं को तंग किया तथा देवताओं ने आहत होकर अपनी रक्षा करने के लिए प्रभु को पुकारा तो भगवान ने सदा ही किसी न किसी रुप में अवतार लेकर उनकी रक्षा की। 

विष्णु पुराण के अनुसार विष्णु के प्रमुख दस अवतारों में से नरसिंह देव चौथा अवतार माने जाते हैं। इस अवतार में भगवान विष्णु आधे मनुष्य अर्थात नर व आधे शेर अर्थात सिंह के रूप में अवतरित हुए थे। कहते हैं कि भगवान श्री नृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। नरसिंह जयंती का दिन अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

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