जिस नदी को लोगों ने कचरे का ढेर बनाया, उसे अकेले चमका गया 20 साल का बिट्टू, आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ

Edited By Updated: 04 Sep, 2026 09:11 AM

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मध्य प्रदेश में अजनार नदी के बढ़ते प्रदूषण को देखकर जहां लोग प्रशासन की ओर देख रहे थे, वहीं 20 साल के युवक सुरेंद्र सिंह चौधरी ने खुद बदलाव लाने का फैसला किया। किसी सरकारी मदद या अभियान का इंतजार किए बिना, सुरेंद्र जरूरी सामान लेकर अकेले ही नदी को...

भोपाल: मध्य प्रदेश में अजनार नदी के बढ़ते प्रदूषण को देखकर जहां लोग प्रशासन की ओर देख रहे थे, वहीं 20 साल के युवक सुरेंद्र सिंह चौधरी ने खुद बदलाव लाने का फैसला किया। किसी सरकारी मदद या अभियान का इंतजार किए बिना, सुरेंद्र जरूरी सामान लेकर अकेले ही नदी को साफ कर डाला। 

सोशल मीडिया पर 'बिट्टू तबाही' के नाम से मशहूर सुरेंद्र प्लास्टिक, कचरा और गंदगी को नदी और आसपास के इलाकों से हटा रहे हैं। इस काम का सारा खर्च वे खुद अपनी जेब से उठाते हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अजनार नदी की सफाई के 'पहले और बाद' (Before and After) की तस्वीरें साझा की हैं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। जहां पहली तस्वीर एक दुखद नज़ारा दिखाती है, वहीं दूसरी तस्वीर लोगों को यह बताती है कि कैसे एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प हमारे पर्यावरण में बड़ा बदलाव ला सकता है।

आनंद महिंद्रा भी कर चुके हैं तारीफ
सुरेंद्र की इस कोशिश को इंटरनेट पर काफी सराहा जा रहा है और इंस्टाग्राम पर उनके 2.96 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। जाने-माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनके इस जज्बे की तारीफ की थी, जिससे इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। 

एक व्यक्ति को सार्वजनिक नदी की सफ़ाई करते देख सोशल मीडिया यूज़र्स ने नगर पालिका अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही के बड़े मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। एक कमेंट में निराशा साफ़ ज़ाहिर की गई: "यह हमारी नगर पालिका के लिए शर्म की बात है।"  एक और यूज़र ने सवाल किया कि कोई व्यक्ति ऐसा काम क्यों कर रहा है जिसे करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के पास संसाधन और ज़िम्मेदारी दोनों हैं। लोगों का कहना है कि जिस काम के लिए नगर पालिका के पास बजट, संसाधन और कर्मचारी मौजूद हैं, उसे एक 20 साल के युवा को अकेले क्यों करना पड़ रहा है?
 
 फिलहाल, सुरेंद्र अपना काम जारी रखे हुए हैं। उनके द्वारा निकाला गया प्लास्टिक का हर टुकड़ा एक छोटी जीत है, लेकिन साथ ही यह याद भी दिलाता है कि नदी को साफ़ रखने का काम कभी भी किसी एक दृढ़ संकल्प वाले 20 साल के युवक पर निर्भर नहीं होना चाहिए, जबकि यह काम पूरे सिस्टम को करना चाहिए।

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