Edited By Rohini Oberoi,Updated: 15 Jun, 2026 09:40 AM

आज के आधुनिक दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लोग अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए ChatGPT, Meta AI या Google Gemini जैसे एडवांस टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन इंटरनेट की इस...
AI Cyber Alert : आज के आधुनिक दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लोग अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए ChatGPT, Meta AI या Google Gemini जैसे एडवांस टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन इंटरनेट की इस जादुई दुनिया में जहां हर सवाल का जवाब पलक झपकते ही मिल जाता है वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिन्हें सर्च करना आपको बेहद भारी पड़ सकता है। अगर आप एआई से बम बनाने, हथियार तैयार करने या किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि का तरीका पूछते हैं तो आप सीधे सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर आ सकते हैं और आपको जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है।
ये आधुनिक एआई प्लेटफॉर्म्स किसी भी तरह की हिंसा फैलाने, बारूद-हथियार बनाने या अवैध गतिविधियों से जुड़ी जानकारी देने से साफ तौर पर मना कर देते हैं। एआई कंपनियां इस तरह के मामलों पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती हैं। अगर कोई यूजर बार-बार सुरक्षा फिल्टर्स को बायपास करने या प्रतिबंधित चीजें खोजने की कोशिश करता है तो उसका एआई अकाउंट हमेशा के लिए सस्पेंड (ब्लॉक) कर दिया जाता है।
भारत के कड़े कानून
भारत में डिजिटल माध्यमों से देश की संप्रभुता और शांति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों के लिए बेहद कड़े कानून हैं। अगर कोई व्यक्ति किसी गलत या देश-विरोधी इरादे से एआई पर बम बनाने की विधि खोजता है तो उस पर 'गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम' (UAPA) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इस कानून में आसानी से जमानत नहीं मिलती। यदि जुर्म साबित हो जाता है तो आरोपी को उम्रकैद (Life Imprisonment) तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा नए कानून 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) और 'आईटी एक्ट' (IT Act) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया जाता है।
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रडार पर रहता है आपका IP एड्रेस
देश की आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और विभिन्न राज्यों की साइबर क्राइम सेल डिजिटल दुनिया की हर हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इंटरनेट या एआई पर बम, ब्लास्ट या अवैध हथियार जैसे खतरनाक कीवर्ड्स टाइप करता है केंद्रीय सुरक्षा तंत्र का ऑटोमैटिक अलर्ट एक्टिव हो जाता है। भले ही चैटबॉट आपको आपके सवाल का जवाब न दे लेकिन आपका आईपी एड्रेस (IP Address), लोकेशन और सर्च हिस्ट्री सुरक्षा एजेंसियों के डेटाबेस में दर्ज हो जाती है।

गंभीर मामलों में एजेंसियां तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपी को पूछताछ के लिए उठा सकती हैं या सीधे गिरफ्तार कर सकती हैं। कई बार लोग बिना किसी गलत इरादे के सिर्फ अपनी जिज्ञासा शांत करने या मनोरंजन के लिए एआई से ऐसे अजीबोगरीब सवाल पूछ लेते हैं लेकिन कानून की नजर में आपके काम के पीछे छिपा 'इरादा' (Intent) सबसे ज्यादा मायने रखता है:

साफ नीयत का देना होगा सबूत: अगर कोई छात्र, पत्रकार या रिसर्चर अपने काम के सिलसिले में गलती से ऐसा कुछ सर्च कर बैठता है तो कानूनी जांच शुरू होने पर उसे अपनी बेगुनाही के पुख्ता और कानूनी सबूत पेश करने होंगे।
पूछताछ और कोर्ट के चक्कर: भले ही आपकी नीयत गलत न हो लेकिन ऐसी संवेदनशील चीजों को इंटरनेट पर टटोलने मात्र से ही आपको पुलिस थानों और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ सकते हैं जिससे आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।