Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 06 Mar, 2026 08:39 PM

संसद का बजट सत्र 2026-27 अब एक अहम मोड़ पर पहुंचने वाला है। 9 मार्च से शुरू हो रहे सत्र के दूसरे चरण में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होने की संभावना है।
नेशनल डेस्क: संसद का बजट सत्र 2026-27 अब एक अहम मोड़ पर पहुंचने वाला है। 9 मार्च से शुरू हो रहे सत्र के दूसरे चरण में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होने की संभावना है। इस मुद्दे को लेकर सियासी माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है और संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
इस बीच बीजेपी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को 9 और 10 मार्च के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। पार्टी ने निर्देश दिया है कि इन दिनों सभी सांसद सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और महत्वपूर्ण कार्यवाही में हिस्सा लें। माना जा रहा है कि स्पीकर के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को देखते हुए सरकार अपनी संख्या ताकत बनाए रखना चाहती है।
दरअसल विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ने कई मौकों पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। विपक्षी दलों का कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया और विपक्षी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। इन्हीं आरोपों के आधार पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
संसद का यह बजट सत्र 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ था। लगभग 65 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 30 बैठकों का कार्यक्रम तय है और इसका समापन 2 अप्रैल 2026 को होना प्रस्तावित है। पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और केंद्रीय बजट 2026-27 से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार आम बजट पेश किया। इसके साथ ही मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति और मैक्रो-इकोनॉमिक फ्रेमवर्क से जुड़े दस्तावेज भी संसद में रखे गए। इसके बाद 14 फरवरी से 8 मार्च तक सत्र में अवकाश रखा गया था, जिसके बाद अब दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा। इस चरण में विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों, विधेयकों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
पहले चरण के दौरान संसद में कई मुद्दों को लेकर तीखा राजनीतिक टकराव भी देखने को मिला। मनरेगा से जुड़े प्रस्ताव को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच बहस छिड़ी रही। विपक्ष ने आरोप लगाया कि रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। इसके अलावा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की।
सत्र के दौरान एक और विवाद उस समय सामने आया जब धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देने की कोशिश की, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख में 2020 के भारत-चीन टकराव से जुड़े बयान को लेकर राहुल गांधी के भाषण के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ। नियमों के उल्लंघन के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित भी किया गया।
लोकसभा में लगातार हो रहे हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना जवाब नहीं दे पाए और 5 फरवरी को यह प्रस्ताव बिना उनके भाषण के ही पारित हो गया। हालांकि राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने इस विषय पर बोलते हुए वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
इसी बीच फरवरी 2026 में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के 118 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के संचालन में निष्पक्षता का पालन नहीं किया गया। वहीं इस विवाद के बीच स्पीकर ओम बिरला ने नैतिक आधार पर यह फैसला लिया कि प्रस्ताव के निपटारे तक वे सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे और अन्य चेयरपर्सन कार्यवाही संचालित करेंगे।
अब 9 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होने की संभावना है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार के पास बहुमत होने के कारण इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन संसद के दूसरे चरण में इस मुद्दे को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म रहने के संकेत मिल रहे हैं।