Edited By Mansa Devi,Updated: 27 Apr, 2026 02:03 PM

हाल के वर्षों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक अहम बदलाव नोट किया है। जिस बीमारी को पहले अधिक उम्र की महिलाओं से जोड़ा जाता था, वही ब्रेस्ट कैंसर अब 20 से 30 साल की युवा महिलाओं में भी तेजी से सामने आ रहा है। अलग-अलग रिपोर्ट्स और वैश्विक...
नेशनल डेस्क: हाल के वर्षों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक अहम बदलाव नोट किया है। जिस बीमारी को पहले अधिक उम्र की महिलाओं से जोड़ा जाता था, वही ब्रेस्ट कैंसर अब 20 से 30 साल की युवा महिलाओं में भी तेजी से सामने आ रहा है। अलग-अलग रिपोर्ट्स और वैश्विक आंकड़ों से पता चलता है कि कम उम्र में इस बीमारी के मामले पहले के मुकाबले बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे केवल आनुवंशिक कारण ही नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली भी एक बड़ी वजह बन रही है। साथ ही, समय पर जांच न कराना और शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना स्थिति को और गंभीर बना देता है।
किन कारणों से बढ़ रहा है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आजकल शादी और मां बनने में देरी आम हो गई है, जिससे हार्मोनल बदलाव प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठे रहना और असंतुलित दिनचर्या भी जोखिम बढ़ाती है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कम उम्र में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर कई बार अधिक तेजी से फैल सकता है। प्रोसेस्ड और जंक फूड का अधिक सेवन, साथ ही प्रदूषण और पर्यावरण में मौजूद हानिकारक तत्व भी शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ते हैं, जिससे कैंसर कोशिकाओं के विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण हर बार दर्द के रूप में नहीं दिखते। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।
- ब्रेस्ट या बगल में गांठ महसूस होना
- त्वचा के रंग या बनावट में बदलाव
- निप्पल से असामान्य तरल निकलना
- ब्रेस्ट के आकार या आकार में अचानक परिवर्तन
- त्वचा का संतरे के छिलके जैसा दिखना
- ऐसे किसी भी संकेत के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बचाव के लिए क्या करें?
अपनी सेहत को प्राथमिकता देना ही सबसे बड़ा बचाव है। हर महीने 'सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन' (खुद से जांच) की आदत डालें। संतुलित आहार लें, वजन नियंत्रित रखें और शराब व धूम्रपान से दूरी बनाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर परिवार में कैंसर की हिस्ट्री रही है तो जेनेटिक टेस्टिंग और रेगुलर स्क्रीनिंग से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।