मौत के मुंह से लौटी 160 किलो की महिला! सांस लेना हुआ मुश्किल, फिर डॉक्टरों ने ऐसे बचाया

Edited By Updated: 13 Apr, 2026 04:48 PM

160 kg woman returns from brink of death doctors save life

गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने 75 वर्षीय एक गंभीर मरीज की जान बचाकर एक मुश्किल मेडिकल केस को सफलतापूर्वक संभाल लिया।

नेशनल डेस्क: गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने 75 वर्षीय एक गंभीर मरीज की जान बचाकर एक मुश्किल मेडिकल केस को सफलतापूर्वक संभाल लिया। यह मामला सीके बिड़ला अस्पताल का है, जहां महिला को बेहद नाजुक हालत में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद मरीज को सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज कर दिया गया।

किस बीमारी से जूझ रही थी महिला?
जानकारी के अनुसार, महिला का वजन करीब 160 किलो था और वह “ओबेसिटी हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम” (OHS) नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। इस बीमारी में शरीर ठीक से सांस नहीं ले पाता, जिससे खून में ऑक्सीजन कम और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाती है। इसके अलावा महिला को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एंग्जायटी और लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण बेडसोर जैसी कई समस्याएं भी थीं। अस्पताल पहुंचने पर उनकी हालत बेहद गंभीर थी। उन्हें दोनों फेफड़ों में निमोनिया और दिल से जुड़ी जटिल समस्याएं भी थीं, जिसके चलते तुरंत उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।


धीरे- धीरे हुआ सुधार
आईसीयू में शुरुआती 24 घंटे के इलाज के बाद उनकी स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला। बुखार और संक्रमण कम होने लगे और जांच रिपोर्टों में भी सुधार दिखा। इसके बाद डॉक्टरों ने करीब 36 घंटे बाद वेंटिलेटर हटाने की कोशिश की, लेकिन अचानक मरीज की हालत बिगड़ गई और उन्हें दोबारा वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज के फेफड़ों की क्षमता मोटापे के कारण बहुत कमजोर हो चुकी थी, जिससे वह खुद से पर्याप्त सांस नहीं ले पा रही थीं। इसी वजह से पहली कोशिश सफल नहीं हो सकी।


ऐसे बची जान
इसके बाद मेडिकल टीम ने इलाज की रणनीति बदली। मरीज को धीरे-धीरे खुद सांस लेने का प्रशिक्षण दिया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से कम किया गया। साथ ही ब्रोंकोस्कोपी तकनीक की मदद से उनके श्वसन मार्ग को बेहतर तरीके से तैयार किया गया। काफी सावधानी और लगातार निगरानी के बाद दूसरी बार वेंटिलेटर हटाने की प्रक्रिया सफल रही और मरीज की हालत स्थिर हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि भारत में मोटापे से जुड़ी सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और कई बार यह तब तक पहचान में नहीं आतीं जब तक स्थिति गंभीर न हो जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच, वजन नियंत्रण और समय पर इलाज ऐसे गंभीर मामलों से बचाव के लिए बेहद जरूरी है।

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