Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 Mar, 2026 11:47 AM

Dollar vs Rupee: पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य हलचल और युद्ध की आशंकाओं ने अब भारतीय अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्रीय तनाव का सीधा प्रहार भारतीय मुद्रा पर हुआ है, जिसके चलते शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे...
Dollar vs Rupee: पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य हलचल और युद्ध की आशंकाओं ने अब भारतीय अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्रीय तनाव का सीधा प्रहार भारतीय मुद्रा पर हुआ है, जिसके चलते शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर जा गिरा। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुद्रा बाजार को संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन वैश्विक दबाव के आगे रुपया टिक नहीं सका और कारोबार की शुरुआत में ही 12 पैसे की कमजोरी के साथ 92.37 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में भी इसकी शुरुआत गिरावट के साथ 92.33 पर हुई थी, जो बीते गुरुवार की 92.25 की क्लोजिंग के मुकाबले काफी कमजोर स्थिति को दर्शाता है।
रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार का गणित
रुपये की इस लगातार गिरती साख के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया का अस्थिर माहौल है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बजाय उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 96.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे रुपये पर दबाव और गहरा जाता है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की अपनी मजबूती भी एक बड़ा कारक है; छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत आंकने वाला इंडेक्स बढ़कर 99.77 के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे निवेशकों का रुझान डॉलर की ओर बढ़ा है।
शेयर बाजार पर असर और विदेशी निवेशकों का रुख
मुद्रा बाजार के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार भी इस भू-राजनीतिक तनाव की तपिश झेल रहा है। शुक्रवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा टूटकर 75,474 के करीब आ गया और निफ्टी में भी लगभग 0.78 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इस नकारात्मक माहौल को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली ने और हवा दी है। आंकड़ों के अनुसार, केवल गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी पूंजी बाहर निकाल ली। विदेशी निवेश का इस तरह बाहर जाना और घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी मिलकर रुपये को और अधिक कमजोर बना रही है।