CBSE की त्रि-भाषा नीति: SC ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार, कहा- विस्तृत सुनवाई के बाद ही दे सकते हैं कोई आदेश

Edited By Updated: 19 Jun, 2026 11:26 AM

cbse three language policy sc refuses interim relief says it can only issue

उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई की उस नीति को लेकर दायर याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसमें 2026-27 सत्र से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए दो भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। अदालत ने कहा कि...

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई की उस नीति को लेकर दायर याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसमें 2026-27 सत्र से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए दो भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। अदालत ने कहा कि इस चरण में कोई अंतरिम आदेश पारित करने का आधार नहीं बनता। 

अंतरिम राहत देने का कोई सवाल ही नहीं
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी' की याचिका को इस मुद्दे पर पहले से लंबित ऐसी ही याचिकाओं के साथ जोड़ दिया। पीठ ने याचिका को अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश देते हुए कहा ''हम आज एक पंक्ति का आदेश पारित नहीं कर सकते। इस मामले में लंबी बहस हुई है। अंतरिम राहत देने का कोई सवाल ही नहीं है।

क्या इस तरह का नाम रखने का मकसद लोगों के मन में डर पैदा करना था
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, एनजीओ की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि वे तीन-भाषा नीति को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि इसके केवल कार्यान्वयन वाले हिस्से को चुनौती दे रहे हैं। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने एनजीओ के नाम 'फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी' पर सवाल उठाया और हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा कि क्या इस तरह का नाम रखने का मकसद अदालत या लोगों के मन में डर पैदा करना था।

लंबित याचिकाओं के साथ 14 जुलाई को होगी सुनवाई 
वकील ने जवाब देते हुए कहा, ''नहीं। यह एक ट्रस्ट का नाम है। यह 2013 में स्थापित एक पुराना ट्रस्ट है।'' उन्होने यह भी कहा कि सीबीएसई को 15 जून तक विस्तृत दिशानिर्देश जारी करने थे। हालांकि, पीठ ने इस मामले को दूसरी लंबित याचिकाओं के साथ 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। उच्चतम न्यायालय ने 27 मई को सीबीएसई की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने के संबंध में सहमति जताई, जिसमें तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया था। 

कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई 
अदालत ने केंद्र, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को नोटिस जारी कर दो हफ़्ते के अंदर विस्तृत जवाब मांगा। सीबीएसई के हालिया परिपत्र के अनुसार, एक जुलाई से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं। यह कदम सीबीएसई की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने अध्ययन ढांचे को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्क्रमय रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप बना रहा है।
 

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