CBI चार्जशीट में बड़ा दावा: NEET-UG पेपर प्रिंटिंग प्रेस से नहीं, NTA एक्सपर्ट्स के एक्सेस से लीक हुआ पेपर

Edited By Updated: 07 Aug, 2026 10:14 AM

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NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है।  चार्जशीट के अनुसार, NEET-UG 2026 पेपर लीक परीक्षा से कुछ हफ्ते पहले अप्रैल 2026 में हुआ था। जांच में सामने आया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा गोपनीय अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन...

नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है।  चार्जशीट के अनुसार, NEET-UG 2026 पेपर लीक परीक्षा से कुछ हफ्ते पहले अप्रैल 2026 में हुआ था। जांच में सामने आया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा गोपनीय अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग प्रक्रिया के लिए नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों ने प्रश्नों को निकालकर लीक किया। CBI ने इन तीन विशेषज्ञों की पहचान मनिषा गुरुनाथ मंधारे, प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (PV कुलकर्णी) और मनिषा संजय हवलदार के रूप में की है। मंधारे को बॉटनी और जूलॉजी, कुलकर्णी को केमिस्ट्री और हवलदार को फिजिक्स की जिम्मेदारी दी गई थी।

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह लीक किसी प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र बाहर निकालने जैसा नहीं था। प्रश्नों को परीक्षा सामग्री तैयार होने की शुरुआती प्रक्रिया के दौरान ही निकाला गया और बाद में उन्हें हाथ से लिखे नोट्स, मौखिक रूप से बताकर और तस्वीरों के जरिए फैलाया गया। 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक के बाद NTA ने रद्द कर दिया था। इसके बाद सभी उम्मीदवारों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।

‘स्पेशल रिविजन सेशन’ में बताए गए थे सवाल और जवाब
CBI के अनुसार, केमिस्ट्री विशेषज्ञ PV कुलकर्णी और बायोलॉजी विशेषज्ञ मनिषा मंधारे ने अप्रैल में पुणे स्थित अपने घरों पर कथित तौर पर गुप्त और गैर-अधिकृत “स्पेशल रिविजन सेशन” आयोजित किए। इन बैठकों में उम्मीदवारों को प्रश्न, चारों विकल्प और सही उत्तर तक बताए गए। मौजूद छात्रों ने इन सवालों और जवाबों को अपनी कॉपियों में लिख लिया।

फिजिक्स के सवालों के लीक होने का तरीका अलग था। जांच के मुताबिक, मनिषा हवलदार ने पुणे के कोचिंग फैकल्टी तेजस हर्षदकुमार शाह को प्रश्न बताए, जिन्हें शाह ने हाथ से लिखा। बाद में इन लिखे हुए पन्नों की तस्वीरें खींचकर आगे भेजी गईं। जांच में यह भी सामने आया कि हवलदार ने शाह का नंबर अपने फोन में 'God' नाम से सेव किया था। शाह ने इन Handwritten questions की तस्वीरें लेकर महाराष्ट्र के लातूर स्थित रेनुकाई करियर सेंटर (RCC) के निदेशक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को भेजीं। CBI ने शाह द्वारा हवलदार के पति के नाम दर्ज मोबाइल नंबर पर किए गए ऑनलाइन भुगतान का भी पता लगाया, जिससे कथित लेन-देन की कड़ी सामने आई।

उम्मीदवारों को अस्पताल ले जाकर याद करवाए  सवाल 
CBI की चार्जशीट के अनुसार, कुलकर्णी और मंधारे ने पुणे के बिचौलिये डॉ. मनोज भगवानराव शिरूरे के साथ मिलकर एक व्यवस्था बनाई, जिसमें कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को लातूर के सिद्धिविनायक अस्पताल ले जाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि अस्पताल में उम्मीदवारों को लीक हुए प्रश्नों को परीक्षा से पहले याद करवाया गया। जांच के दौरान CBI ने डॉ. शिरूरे के परिवार के एक सदस्य से 5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए।

महाराष्ट्र से राजस्थान तक पहुंचा पेपर लीक नेटवर्क
CBI के मुताबिक, लीक हुए प्रश्न महाराष्ट्र से बाहर भी भेजे गए और डिजिटल माध्यमों के जरिए कई राज्यों तक पहुंचाए गए। चार्जशीट में बताया गया है कि नासिक के शुभम खैरनार ने गुरुग्राम के यश यादव से संपर्क किया। इसके बाद लीक प्रश्नों को PDF फाइल में बदला गया और टेलीग्राम के जरिए यादव को भेजा गया। यादव ने कथित तौर पर 10 से 12 लाख रुपये के बदले ये PDF जयपुर के मंगललाल बिवाल को भेजे। इसके बाद बिवाल ने प्रश्नों की प्रिंट कॉपियां तैयार कर उन्हें अपने परिवार के सदस्यों, स्थानीय कोचिंग संस्थानों से जुड़े छात्रों और निजी शिक्षकों तक पहुंचाया। CBI के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क NTA की गोपनीय प्रक्रिया से निकले सवालों को पहले महाराष्ट्र में निजी रिविजन सेशन तक और फिर डिजिटल माध्यमों से दूसरे राज्यों तक पहुंचाने में शामिल था।

Hand Written नोट्स और original question paper में हुई समानता की पुष्टि
CBI की जांच को जब्त की गई नोटबुक और फोरेंसिक जांच से भी समर्थन मिला। छापेमारी के दौरान बरामद कॉपियों की जांच केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) और सरकारी प्रश्नित दस्तावेज परीक्षक (GEQD) द्वारा की गई। जांच में पाया गया कि उम्मीदवारों की कॉपियों में लिखे गए प्रश्न 3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। इसके अलावा, जांच एजेंसी ने डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और बरामद नकदी को भी इस मामले में अहम सबूत बताया है। CBI के अनुसार, फोरेंसिक रिपोर्ट, वित्तीय रिकॉर्ड और जब्त दस्तावेजों से यह पूरी कड़ी सामने आई कि अप्रैल में NTA की गोपनीय प्रक्रिया से निकाले गए प्रश्न परीक्षा से पहले उम्मीदवारों और बिचौलियों तक कैसे पहुंचे।
 

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