पाकिस्तान से ईरान तक चीन का ‘सुपर मिसाइल शील्ड’ फेल ! दुनिया उड़ा रही HQ-9B सिस्टम की जमकर खिल्ली

Edited By Updated: 15 Mar, 2026 02:21 PM

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एक रिपोर्ट के अनुसार चीन का HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम वास्तविक युद्ध स्थितियों में बार-बार असफल रहा है। पाकिस्तान, वेनेजुएला और ईरान में यह मिसाइल प्रणाली हमलों को रोकने में विफल बताई गई, जिससे चीन की सैन्य तकनीक और हथियार निर्यात की विश्वसनीयता पर...

Washington: एक नई रिपोर्ट के अनुसार चीन का अत्याधुनिक माना जाने वाला एयर डिफेंस सिस्टम HQ‑9B surface‑to‑air missile system वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में गंभीर रूप से असफल साबित हुआ है। अमेरिकी अख़बार The Hill की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की मिसाइल और रडार तकनीक, जो सैन्य परेड में प्रभावशाली दिखाई देती है, युद्ध के मैदान में “अंधी, बहरी और गूंगी” साबित हुई। रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में तीन अलग-अलग देशों में चीन के हथियारों की क्षमता पर सवाल उठे हैं।

 

भारत के Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान ने चीनी HQ-9B सिस्टम तैनात किया था। लेकिन भारतीय हमलों के सामने यह प्रणाली प्रभावी तरीके से न तो मिसाइलों को रोक सकी और न ही लक्ष्यों को सही तरह ट्रैक कर पाई। वेनेजुएला में चीन के JY‑27A radar सिस्टम भी विफल बताए गए। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी ऑपरेशन के दौरान ये रडार कई विमानों का पता तक नहीं लगा पाए।हालिया अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों के दौरान ईरान में तैनात HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम भी हमलों को रोकने में विफल रहा। कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले हुए और रक्षा प्रणाली कोई इंटरसेप्शन नहीं कर सकी।

 

तकनीकी समस्याएं  

  • विश्लेषकों के अनुसार कई तकनीकी कारण सामने आए हैं:
  • उन्नत इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के सामने रडार कमजोर
  • सॉफ्टवेयर में फायर-कंट्रोल देरी
  • स्टील्थ फाइटर जेट जैसे F‑35 Lightning II को ट्रैक करने में कठिनाई
  • अलग-अलग रक्षा प्रणालियों के बीच कमजोर नेटवर्क इंटीग्रेशन
  • इन कमियों के कारण मिसाइल सिस्टम हमलों का समय पर जवाब नहीं दे पाया।

 

चीन की हथियार निर्यात साख पर असर
चीन दुनिया का बड़ा हथियार निर्यातक है और कई देशों जैसे पाकिस्तान, ईरान, मिस्र और अज़रबैजान—ने अरबों डॉलर खर्च कर उसके एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे हैं। लेकिन हालिया घटनाओं के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रणालियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और इससे चीन की रक्षा तकनीक की अंतरराष्ट्रीय छवि को झटका लग सकता है।
  

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