कंगाली की कगार पर पाकिस्तान: रेलवे का बुरा हाल, पुर्जे निकालकर चल रही हैं ट्रेनें; पैसेंजर्स की सुरक्षा भगवान भरोसे

Edited By Updated: 24 Apr, 2026 12:57 AM

pakistan on the verge of poverty railways in dire straits

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के हालात अब इस कदर बिगड़ चुके हैं कि उसके पास रेलवे चलाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। भीखमंगे पाकिस्तान में रेलवे व्यवस्था गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है, जहां बहुत कम संसाधनों के बीच जैसे-तैसे सेवाओं को खींचा...

इस्लामाबाद/लाहौर: आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के हालात अब इस कदर बिगड़ चुके हैं कि उसके पास रेलवे चलाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। भीखमंगे पाकिस्तान में रेलवे व्यवस्था गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है, जहां बहुत कम संसाधनों के बीच जैसे-तैसे सेवाओं को खींचा जा रहा है। डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, फंड की भारी कमी के कारण इंजनों, कोचों, वैगनों और रेलवे ट्रैक के रखरखाव में गंभीर समझौते किए जा रहे हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

एक डिब्बे के पुर्जे निकाल दूसरे को किया जा रहा ठीक
पाकिस्तानी रेलवे की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां कर्मचारियों को एक कोच के पुर्जे निकालकर दूसरे कोच की मरम्मत करनी पड़ रही है। यह स्थिति केवल एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पाकिस्तान रेलवे के सभी आठ डिवीजनों— लाहौर, कराची, मुल्तान, सुक्कुर, क्वेटा, रावलपिंडी, पेशावर और वर्कशॉप डिवीजन की है। हालत यह है कि निवर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के लिए भी व्यवस्था का संचालन करना और कर्मचारियों को समय पर सैलरी देना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

50% पद खाली, 5 लाख के लिए भी तरस रहे अधिकारी
रेलवे प्रशासन न केवल आर्थिक बल्कि प्रशासनिक संकट से भी जूझ रहा है। लाहौर डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वहां करीब 50 प्रतिशत स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। वहीं, फाइलों का बोझ इस कदर है कि 5 लाख पाकिस्तानी रुपये (PKR) जैसे छोटे फंड की मंजूरी के लिए भी मुख्यालय की लंबी नौकरशाही प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद, रेलवे कर्मचारी भारी दबाव में काम कर रहे हैं ताकि ट्रेनों का पहिया थमा न रहे।

2026 में चरम पर पहुंचा संकट
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी रेलवे की यह दुर्गति पिछले 6-7 सालों से जारी संरचनात्मक कमजोरियों का नतीजा है, जो साल 2026 में आकर अपने सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात यही रहे, तो परिचालन और रेवेन्यू के लक्ष्यों को हासिल करना नामुमकिन हो जाएगा और पूरी व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।

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