Edited By Parveen Kumar,Updated: 27 May, 2026 11:07 PM

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों की "नैतिक, राजनीतिक व संवैधानिक" आधारों पर "पूरी तरह हार" बताया और कहा कि गांधी को आत्ममंथन करना...
नेशनल डेस्क : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों की "नैतिक, राजनीतिक व संवैधानिक" आधारों पर "पूरी तरह हार" बताया और कहा कि गांधी को आत्ममंथन करना चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि कानूनी मंजूरी से एसआईआर को प्रारंभिक वैधता तो मिल सकती है, लेकिन यह इसके क्रियान्वयन में मौजूद "दुर्भावना" को सही नहीं ठहरा सकती।
न्यायालय ने एसआईआर कराने की निर्वाचन आयोग की शक्ति को बरकरार रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक उद्देश्यों को मजबूती प्रदान करती है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया "स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता" को बढ़ावा देती है। शीर्ष अदालत के फैसले पर टिप्पणी करते हुए, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "यह कांग्रेस की, विशेष रूप से राहुल गांधी की, पूरी तरह से हार है। कांग्रेस और विपक्षी दल नैतिक, राजनीतिक व संवैधानिक तीनों स्तरों पर हार गए हैं।" उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के साथ ही राहुल गांधी के सभी आरोप विफल और पूरी तरह निष्प्रभावी हो गए हैं।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य त्रिवेदी ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, "मैं कांग्रेस से, विशेष रूप से राहुल गांधी से कहना चाहूंगा कि वे इस फैसले के बाद आत्ममंथन करें और अपशब्दों का इस्तेमाल बंद करें।" भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 'एक्स' पर लिखा, "यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने पूरी एसआईआर प्रक्रिया का विरोध इसलिए किया क्योंकि वे अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े थे, न कि भारतीय मतदाताओं के साथ। यह वास्तव में एक राष्ट्र-विरोधी कृत्य था।" उन्होंने सवाल किया, "क्या राहुल गांधी आज भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए माफी मांगेंगे?" बिहार में हुई एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा करते हुए न्यायालय ने बुधवार को कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना किसी व्यक्ति के कानूनी रूप से नागरिक न होने की घोषणा करना नहीं है। अदालत के अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता मतदाता सूची की सटीकता पर निर्भर करती है।
पीठ ने कहा, "हम यह निष्कर्ष निकालने में असमर्थ हैं कि यह विवादित प्रक्रिया केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनाई गई।" इस बीच, कांग्रेस ने कहा कि हालांकि न्यायालय ने एसआईआर की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया है, लेकिन उसके फैसले से जितने सवालों को जवाब मिला, उससे ज्यादा नए सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी ने इस फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि कानूनी मंजूरी से एसआईआर को प्रारंभिक वैधता मिल सकती है, लेकिन यह इसके क्रियान्वयन में मौजूद "दुर्भावना" को सही नहीं ठहरा सकती। पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि यह मुद्दा हमेशा से "मूल बात और इरादे" का था, न कि सिर्फ "तरीके" का। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस प्रक्रिया के तरीके, ढंग, समय और शैली पर सवाल उठाए थे।