दिल्ली में हर संपत्ति को मिलेगी डिजिटल पहचान, सरकार ला रही 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड' व्यवस्था

Edited By Updated: 30 Jul, 2026 09:27 PM

every property in delhi will get a digital identity

दिल्ली सरकार भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 तैयार कर रही है और शहर में प्रत्येक संपत्ति के लिए 'संपत्ति आधार कार्ड' पेश करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि इस विधेयक के कानून बनने...

नेशनल डेस्क : दिल्ली सरकार भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 तैयार कर रही है और शहर में प्रत्येक संपत्ति के लिए 'संपत्ति आधार कार्ड' पेश करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद पूरी दिल्ली की प्रत्येक संपत्ति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और इसके बाद प्रत्येक संपत्ति के लिए एक विशिष्ट 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड' बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जिस प्रकार आधार कार्ड ने प्रत्येक नागरिक की पहचान को एक विश्वसनीय स्वरूप प्रदान किया है, उसी प्रकार अब दिल्ली की प्रत्येक संपत्ति की भी एक प्रमाणिक और सुरक्षित डिजिटल पहचान सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे राजधानी में संपत्तियों के रिकॉर्ड पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनेंगे। गुप्ता ने कहा कि इस विधेयक को लेकर सरकार अलग से विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार पहले चरण में केंद्र सरकार की 'स्वामित्व' योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में आधुनिक तकनीक और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से ड्रोन सर्वेक्षण कर स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार कर चुकी है। गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित 'दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026' के तहत केवल गांव ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की प्रत्येक आवासीय, व्यावसायिक एवं अन्य प्रकार की संपत्तियों का भी विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा और प्रत्येक भवन के प्रत्येक तल तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि राजधानी की कोई भी संपत्ति इस प्रक्रिया से बाहर न रहे।

उन्होंने कहा, "नई व्यवस्था लागू होने के बाद संपत्तियों का प्रमाणिक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे रिकॉर्ड संबंधी अस्पष्टता दूर होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। यह पहल केवल रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की डिजिटल शासन व्यवस्था की मजबूत नींव भी बनेगी।"

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