निर्वाचन आयोग अगर चुनाव लड़ने वाले पर निर्भर हो, तो निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं: न्यायमूर्ति नागरत्ना

Edited By Updated: 05 Apr, 2026 03:36 PM

fair elections are impossible if the election commission is dependent on the can

उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने निर्वाचन आयोग को चुनावों को निष्पक्ष बनाए रखने वाली प्रमुख संस्था बताते हुए कहा कि यदि चुनाव संचालित करने वाले लोग उम्मीदवारों पर निर्भर हों, तो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित...

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने निर्वाचन आयोग को चुनावों को निष्पक्ष बनाए रखने वाली प्रमुख संस्था बताते हुए कहा कि यदि चुनाव संचालित करने वाले लोग उम्मीदवारों पर निर्भर हों, तो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। शीर्ष न्यायालय की न्यायाधीश ने पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान देते हुए मतदान प्रक्रिया की निगरानी करने वाली संस्थाओं की संरचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंता जताई।

निर्वाचन आयोग एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था
उन्होंने उच्चतम न्यायालय के 1995 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा, ''एक बार फिर यह संरचनात्मक चिंता है कि यदि चुनाव संचालित करने वाले, चुनाव लड़ने वालों पर निर्भर हों, तो प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। न्यायालय ने 1995 के इस फैसले में निर्वाचन आयोग को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था करार दिया था। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि चुनाव केवल समय-समय पर होने वाली घटनाएं नहीं हैं, बल्कि वे प्रक्रियाएं हैं जिनके माध्यम से सरकार का गठन होता है।

चुनाव, सार्वजनिक वित्त और विनियमन
उन्होंने कहा, ''हमारी संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह प्रदर्शित किया है कि समय पर चुनाव होने से सरकारों का सुचारू रूप से परिवर्तन संभव हुआ है। इस प्रक्रिया पर नियंत्रण, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की शर्तों पर नियंत्रण के समान है।' उन्होंने कहा कि सत्ता केवल औपचारिक संस्थाओं के माध्यम से ही नहीं, बल्कि उन प्रक्रियाओं के जरिए भी संचालित होती है जो उन्हें बनाए रखती हैं, जैसे चुनाव, सार्वजनिक वित्त और विनियमन। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि सत्ता को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक संरचना को इन 'चौथे स्तंभ' जैसी संस्थाओं पर भी ध्यान देना होगा। 

संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं भले ही पारंपरिक तीन स्तंभों (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) में न आती हों, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश ने केंद्र-राज्य संबंधों के मुद्दे पर ''दलगत मतभेदों को अलग रखने'' की अपील करते हुए कहा कि शासन इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि केंद्र में कौन-सी पार्टी और राज्य में कौन-सी पार्टी सत्ता में है। 

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