सड़क हादसे में माता-पिता को खोने वाले 5 बच्चों को मिला इंसाफ, कोर्ट ने दिलाया ₹44 लाख से ज्यादा मुआवजा

Edited By Updated: 09 Aug, 2026 03:36 PM

five children who lost their parents in a road accident received justice the co

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुये निर्देश दिया कि 2021 में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटना मारे गए एक दंपति के पांच बच्चों को 44 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिया जाये। पीठासीन अधिकारी अपर्णा स्वामी ने 'इफ़्को तोक्यो जनरल...

नयी दिल्ली: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुये निर्देश दिया कि 2021 में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटना मारे गए एक दंपति के पांच बच्चों को 44 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिया जाये। पीठासीन अधिकारी अपर्णा स्वामी ने 'इफ़्को तोक्यो जनरल इंश्योरेंस' कंपनी को निर्देश दिया कि याचिकाएं दायर करने की तारीख से 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ कुल 44.09 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

न्यायाधिकरण ने 30 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ''प्रतिवादी संख्या-एक दुर्घटना के समय लापरवाही और तेज गति से वाहन चला रहा था। दुर्घटनाग्रस्त वाहन की 'मेकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट' भी याचिकाकर्ताओं के बयान की पुष्टि करती है।'' न्यायाधिकरण ने बृजनंदन और उनकी पत्नी राजकुमारी की मृत्यु के लिए क्रमशः 19.86 लाख रुपये और 24.23 लाख रुपये के अलग-अलग मुआवजे का आदेश दिया। 

दावा याचिकाओं के अनुसार, यह दंपति दो जुलाई 2021 को बुलंदशहर जिले में मोटरसाइकिल से जा रहे थे तभी एक कार ने तेज गति से उनकी मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी जिससे वे सड़क पर गिर गए और कार उन्हें कुचलते हुए निकल गई। अस्पताल में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। वाहन चालक, मालिक और बीमा कंपनी ने इस दावे का विरोध किया था।

बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन का पंजीकरण नंबर शुरुआत में प्राथमिकी और जांच रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था। इस तर्क को खारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि जांच में बाद में वाहन का पता लगा लिया गया था और 'मेकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट', पंजीकरण प्रमाणपत्र व बीमा पॉलिसी के माध्यम से दुर्घटना में उसकी संलिप्तता साबित हुई। 

अदालत ने एक प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर भरोसेमंद माना जिसने कहा कि उसने कार को अपनी मोटरसाइकिल से आगे निकलते, दंपति की मोटरसाइकिल को पीछे से जोरदार टक्कर मारने के बाद मौके से फरार होते देखा था। न्यायाधिकरण ने माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई। उसने कहा कि जांच में मामूली खामियां विश्वसनीय मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को खारिज नहीं कर सकतीं।
 

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