Edited By Pardeep,Updated: 05 Aug, 2026 12:44 AM

हवाई यात्रा को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में 'टर्बुलेंस' (हवाई हलचल) की घटनाओं ने यात्रियों के बीच डर पैदा कर दिया है। विमानों के अचानक हजारों फीट नीचे गिरने और यात्रियों के घायल होने की कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जो हवाई...
नेशनल डेस्कः हवाई यात्रा को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में 'टर्बुलेंस' (हवाई हलचल) की घटनाओं ने यात्रियों के बीच डर पैदा कर दिया है। विमानों के अचानक हजारों फीट नीचे गिरने और यात्रियों के घायल होने की कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जो हवाई सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं। ऐसी ही एक नई घटना थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट मंगलवार, 4 अगस्त को उस समय भयावह हादसे का शिकार होते-होते बच गई, जब उड़ान के दौरान विमान अचानक तेज एयर टर्बुलेंस की चपेट में आ गया। टर्बुलेंस के कारण विमान लगभग 300 फीट नीचे गिर गया, जिससे विमान के अंदर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में 10 यात्रियों और 4 क्रू मेंबर समेत कुल 14 लोग घायल हो गए। विमान ने हालांकि सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर लैंडिंग कर ली।
आखिर टर्बुलेंस होता क्यों है?
खराब मौसम
टर्बुलेंस की सबसे बड़ी वजह खराब मौसम होता है। जब बड़े-बड़े बादलों के भीतर हवा बहुत तेजी से ऊपर-नीचे चलती है और विमान उस क्षेत्र से गुजरता है तो उसमें तेज झटके महसूस हो सकते हैं।
पहाड़ों की वजह से
अगर तेज गति से चल रही हवा किसी पहाड़ से टकराती है तो उसके पीछे हवा में लहरें बन जाती हैं। जब कोई विमान इन लहरों के बीच से गुजरता ह तो उसमें भी झटके महसूस होते हैं। इसे माउंटेन वेव टर्बुलेंस कहा जाता है।
साफ मौसम में भी हो सकता है टर्बुलेंस
एक प्रकार का टर्बुलेंस ऐसा भी होता है जिसमें न बादल होते हैं और न ही बारिश। इसके बावजूद विमान झटके महसूस करता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बहुत अधिक ऊंचाई पर तेज हवाएं अलग-अलग गति से चल रही होती हैं। इन्हें जेट स्ट्रीम कहा जाता है. जब विमान इन हवाओं के बीच पहुंचता है तो उसे क्लियर एयर टर्बुलेंस महसूस हो सकता है।
गर्म और ठंडी हवा के मिलने से
दिन के समय जमीन गर्म हो जाती है। गर्म हवा ऊपर उठती है जबकि ठंडी हवा नीचे आती है। हवा के इसी ऊपर-नीचे होने से वातावरण में हलचल पैदा होती है। जब विमान इस क्षेत्र से गुजरता है तो उसे टर्बुलेंस महसूस होता है। तकनीकी भाषा में इसे थर्मल टर्बुलेंस कहा जाता है।
टर्बुलेंस की प्रमुख घटनाएं-
सिंगापुर एयरलाइंस में मचा कोहराम
मई 2024 में लंदन से सिंगापुर जा रही सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान के दौरान एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। म्यांमार के ऊपर उड़ान भरते समय बोइंग 777 विमान अचानक कुछ ही सेकंड में करीब 6,000 फीट नीचे गिर गया। इस भयानक टर्बुलेंस के कारण एक यात्री की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई और 70 से अधिक लोग घायल हो गए।
अमृतसर-दिल्ली फ्लाइट में खिड़की का पैनल निकला
भारत में भी ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। अप्रैल 2018 में एअर इंडिया के अमृतसर से दिल्ली जा रहे बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान में इतना तेज टर्बुलेंस हुआ कि विमान की एक खिड़की का अंदरूनी पैनल ही बाहर निकल आया। इस दौरान ऊपर रखा सामान गिरने से 3 यात्री घायल हो गए थे। वहीं, मई 2022 में स्पाइसजेट के मुंबई-दुर्गापुर विमान के लैंडिंग के समय टर्बुलेंस में फंसने से 14 यात्री और 3 क्रू सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सीट बेल्ट न बांधना पड़ा भारी
मार्च 2024 में सिडनी से आकलैंड जा रही लाटम एयरलाइंस की फ्लाइट में तकनीकी खराबी और टर्बुलेंस के कारण विमान अचानक नीचे की ओर झुक गया। जिन यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं बांधी थी, वे सीधे विमान की छत से जा टकराए, जिससे 50 से अधिक लोग घायल हुए। इसी तरह दिसंबर 2022 में हवाईयन एयरलाइंस की उड़ान में लैंडिंग से पहले हुए टर्बुलेंस ने 36 यात्रियों को घायल कर दिया था, जिनमें से 11 को गंभीर चोटें आई थीं।
अन्य प्रमुख घटनाएं:
एमीरेट्स (2023): पर्थ से दुबई जा रहे विमान में हिंद महासागर के ऊपर अचानक टर्बुलेंस होने से 14 लोग घायल हुए।
टर्बुलेंस का असर: इन सभी घटनाओं में एक बात सामान्य रही कि विमान के अचानक झटके लेने से यात्रियों के सिर सामान रखने वाले खानों (ओवरहेड बिन्स) से टकराए और सामान गिरने से लोग चोटिल हुए।