Edited By Anu Malhotra,Updated: 07 Jul, 2026 11:52 AM

गुजरात उच्च न्यायालय ने 2008 के अहमदाबाद बम विस्फोट मामले में 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 लोगों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।
नेशनल डेस्क: गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में 38 दोषियों को मौत की सज़ा और 11 अन्य को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी।
जस्टिस ए वाई कोगजे और समीर दवे की डिवीज़न बेंच ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सभी अपीलें खारिज कर दीं और इस मामले में आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) के सदस्यों को सुनाई गई सज़ाओं की पुष्टि करते हुए अपना फ़ैसला बरकरार रखा। 26 जुलाई 2008 को, 70 मिनट के अंदर अहमदाबाद में 21 बम धमाके हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 अन्य घायल हो गए। शहर के कुछ अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया था। 2022 में एक स्पेशल कोर्ट ने IM के 38 सदस्यों को मौत की सज़ा सुनाई थी। कोर्ट ने 11 अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।
इस आतंकी हमले की इस्लामिक आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी। इस बीच, दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले में भी एक और जांच चल रही है, जिसमें नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने धमाके में मारे गए लोगों के शरीर के अंगों से जुड़ी फ़ोरेंसिक रिपोर्ट दाखिल की है। कोर्ट ने फ़ोरेंसिक रिपोर्ट की जांच के लिए मामले को सूचीबद्ध किया है। NIA के अनुसार, तेज़ धमाके वाले VBIED (गाड़ी में रखे गए इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे, साथ ही आस-पास की संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
NIA ने 9 आरोपियों को स्पेशल जज (NIA) पीतांबर दत्त के सामने पेश किया, जिन्होंने उनकी न्यायिक हिरासत अगली तारीख तक बढ़ा दी। कोर्ट ने मामले को 13 जुलाई के लिए लिस्टड किया है। NIA पहले ही शाहीन सईद और अन्य सहित 10 आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ज़मीर अहमद अहंगर और तुफ़ैल अहमद भट के ख़िलाफ़ दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर भी NIA कोर्ट में विचार किया जाना बाकी है।
NIA ने नवंबर 2025 के दिल्ली ब्लास्ट मामले में ज़मीर अहमद अहंगर, तुफ़ैल अहमद भट और एक फ़रार आरोपी के ख़िलाफ़ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। ज़मीर और तुफ़ैल को फरवरी 2026 में गिरफ़्तार किया गया था। एजेंसी इस मामले में पहले ही मुख्य चार्जशीट दायर कर चुकी है। आरोप है कि ज़मीर और तुफ़ैल हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा कर रहे थे। ज़मीर को उमर, इरफ़ान और आदिल ने एक राइफ़ल, एक पिस्तौल और ज़िंदा कारतूस दिए थे। ये तीनों 'अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद' से जुड़े हैं। यह मामला नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके से जुड़ा है।