Edited By Purnima Singh,Updated: 06 Apr, 2026 03:23 PM

दिल्ली के एक साधारण से मकान ने कभी एक युवक को आईएएस बनने का रास्ता दिखाया था, और अब वही घर सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संवारने का माध्यम बन गया है। छत्तीसगढ़ कैडर के 2008 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश सिंह राणा ने अपने जीवन से जुड़े इस खास घर को समाज...
नेशनल डेस्क : दिल्ली के एक साधारण से मकान ने कभी एक युवक को आईएएस बनने का रास्ता दिखाया था, और अब वही घर सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संवारने का माध्यम बन गया है। छत्तीसगढ़ कैडर के 2008 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश सिंह राणा ने अपने जीवन से जुड़े इस खास घर को समाज के नाम कर दिया है।
कोचिंग सेंटर में बदला घर
दिल्ली के सीमापुरी इलाके में स्थित इस मकान में रहकर राजेश सिंह राणा ने यूपीएससी की तैयारी की थी। अब यही घर शिक्षा और कौशल विकास का केंद्र बन चुका है। यहां छठी से 12वीं तक के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं कई युवाओं को रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही, लड़कियां जूडो-कराटे सीख रही हैं और महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इस तरह यह घर अब सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन का केंद्र बन गया है।
पिता की याद में लिया बड़ा फैसला
इस घर को दान करने का निर्णय राजेश सिंह राणा ने अपने पिता अजीत सिंह के निधन के बाद लिया। उनके पिता, जो बीएसएफ में आरक्षक थे, सेवानिवृत्ति के बाद दिल्ली आए थे और इसी मकान को खरीदा था। 25 जनवरी 2026 को पिता के निधन के बाद जब राणा इस घर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि यहां एक संस्था बच्चों को प्रशिक्षण दे रही है। इसी दौरान उन्होंने संस्था की प्रमुख से बातचीत की और बिना देर किए यह घर संस्था को समर्पित कर दिया।
‘यह घर मेरे लिए आशीर्वाद जैसा’
राजेश सिंह राणा का कहना है कि यह मकान उनके जीवन में बेहद खास रहा है। उन्होंने यहीं से अपनी पढ़ाई पूरी की और सिविल सेवा की तैयारी की। उनके अनुसार, यह घर उनके पिता के आशीर्वाद का प्रतीक है, और इसी भावना से उन्होंने इसे समाज के हित में दान करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यदि इस केंद्र को किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता होगी, तो वे उसमें सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।
नई पहचान: स्किल सेंटर
अब इस मकान को “अजीत सिंह राणा मेमोरियल स्किल सेंटर” के नाम से जाना जा रहा है, जहां शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी काम किया जा रहा है।