ब्रह्मोस से टैंक तक: भारत-रूस की रक्षा दोस्ती में बड़ा बदलाव, अब दोनों देश मिलकर बनाएंगे सैन्य उपकरण

Edited By Updated: 23 Sep, 2026 05:21 PM

india russia defence ties gain fresh momentum through joint development

भारत और रूस की रक्षा साझेदारी अब पारंपरिक हथियार खरीद से आगे बढ़कर संयुक्त विकास और भारत में उत्पादन की दिशा में बढ़ रही है। ब्रह्मोस के आधुनिकीकरण और T-90MS टैंक के संभावित संयुक्त उत्पादन पर सहयोग की चर्चा है। भारतीय थल सेना प्रमुख की रूस यात्रा...

Moscow: भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रक्षा साझेदारी अब हथियारों की पारंपरिक खरीद से आगे बढ़कर संयुक्त विकास और भारत में सैन्य उपकरणों के उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग के स्वरूप को बदल रही है।भारत लंबे समय से रूसी मूल के लड़ाकू विमानों, टैंकों, बख्तरबंद वाहनों, मिसाइल और वायु रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करता रहा है। हालांकि, अब सहयोग का जोर केवल तैयार हथियार खरीदने के बजाय तकनीक, संयुक्त विकास और भारत में निर्माण पर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

 

मोदी-पुतिन की मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
हाल में नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई थी। इनमें राजनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग के साथ रक्षा संबंध भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल बताए गए। इसके कुछ ही दिन बाद भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रूस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर गए। यह करीब आठ साल बाद किसी सेवारत भारतीय थल सेना प्रमुख की रूस यात्रा थी। इससे पहले जनरल बिपिन रावत अक्टूबर 2018 में रूस गए थे। जनरल सेठ ने रूस में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण और रक्षा क्षमताओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। उनकी यात्रा के दौरान रूसी मूल की मौजूदा सैन्य प्रणालियों के उन्नयन, कलपुर्जों की उपलब्धता और रक्षा उद्योग से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण रहे।

 

ब्रह्मोस पर भी सहयोग बढ़ने की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस मिसाइल विकास के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा सकते हैं। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के आगे आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। ब्रह्मोस भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है। पिछले वर्षों में भारत ने इस मिसाइल में कई बदलाव और उन्नयन किए हैं। ब्रह्मोस के विकास और निर्माण में दोनों देशों की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं का योगदान रहा है। आधिकारिक ब्रह्मोस जानकारी के अनुसार, भारत में इसके उत्पादन और स्वदेशीकरण में भारतीय कंपनियों और संस्थानों की भूमिका लगातार बढ़ी है। ब्रह्मोस से जुड़े औद्योगिक ढांचे में भारत की ओर से डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मार्गदर्शन प्रणाली, एवियोनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान किया गया है, जबकि रूस की तकनीकी विशेषज्ञता ने भी परियोजना को महत्वपूर्ण आधार दिया है।

 

T-90MS टैंक पर रूस का प्रस्ताव
रिपोर्ट में बख्तरबंद वाहनों के क्षेत्र में सहयोग की भी चर्चा की गई है। इसके अनुसार, रूस की सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने भारत को T-90MS मुख्य युद्धक टैंक के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दिया है।भारत पहले से ही बड़ी संख्या में T-90S टैंकों का देश में निर्माण करता है। ऐसे में T-90MS का संयुक्त उत्पादन मौजूदा उत्पादन व्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला कदम हो सकता है। अगस्त में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने T-90MS के साथ भारत के भविष्य के बख्तरबंद वाहन कार्यक्रमों के लिए तकनीकी हस्तांतरण की संभावनाओं की भी पेशकश की थी। भारत-रूस रक्षा संबंध लंबे समय तक मुख्य रूप से रूसी सैन्य उपकरणों की खरीद पर आधारित रहे हैं। अब भारत अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ विदेशी साझेदारों के साथ संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर भी जोर दे रहा है।इस बदलाव का असर ब्रह्मोस जैसी संयुक्त परियोजनाओं में दिखाई देता है, जहां भारत ने उत्पादन, तकनीक और उन्नयन में अपनी भूमिका बढ़ाई है।  

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