तेल संकट के बीच बड़ी राहत: ईरान ने भारत के लिए खोल दिए होर्मुज के दरवाजे, जहाजों को मिलेगी सुरक्षित आवाजाही

Edited By Updated: 05 Nov, 2026 11:31 AM

iran allows indian ships free passage through hormuz

ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य की आवाजाही संबंधी पाबंदियों से छूट देने की घोषणा की है। भारत को यह राहत दवाओं के आयात से जुड़ी जरूरतों के कारण मिली है। इससे ऊर्जा आपूर्ति को मदद मिल सकती है, लेकिन समुद्री सुरक्षा का...

Tehran: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने भारत को लेकर एक अहम फैसला किया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मोकद्दम ने बताया है कि भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर लगाई गई पाबंदियों से छूट दी गई है। उनका कहना है कि इन चार देशों के जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही कर सकते हैं और अमेरिकी नौसेना भी उन्हें नहीं रोक रही है। ईरानी नेता के इस बयान को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इस घोषणा के क्रियान्वयन और इससे गुजरने वाले जहाजों की वास्तविक स्थिति को लेकर अलग से स्पष्टता जरूरी है।

 

भारत को छूट देने के पीछे रणनीति 
अमीर हयात मोकद्दम के मुताबिक, भारत को यह रियायत देने के पीछे ईरान की एक महत्वपूर्ण जरूरत है। तेहरान भारत से आवश्यक दवाओं का आयात करना चाहता है। ऐसे में भारतीय जहाजों को रास्ता देने से दोनों देशों के बीच जरूरी वस्तुओं का व्यापार जारी रखने में मदद मिलेगी। वहीं चीन के जहाजों को छूट देने के पीछे बीजिंग का राजनीतिक और आर्थिक समर्थन हासिल करने की रणनीति बताई गई है। ईरानी नेता ने कहा कि भारत और चीन के जहाजों से पारगमन शुल्क लिया जाता है, जबकि कतर के जहाजों को बिना शुल्क गुजरने की अनुमति है। इराकी जहाजों के लिए शुल्क संबंधी व्यवस्था पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।इससे साफ है कि ईरान होर्मुज के रास्ते को केवल समुद्री आवाजाही के रूप में नहीं, बल्कि अपने रणनीतिक और कूटनीतिक हितों को साधने के माध्यम के तौर पर भी इस्तेमाल कर रहा है।

 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण होर्मुज 
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित संकरा समुद्री रास्ता है, जिसके जरिए खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचती है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की लगभग पांचवीं हिस्सेदारी वाली तेल और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें करीब 30 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। ऐसे में इस मार्ग पर लंबे समय तक रुकावट रहने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति, परिवहन लागत और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।ईरान की ओर से भारतीय जहाजों को छूट मिलने से तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की आवाजाही को राहत मिल सकती है। इससे आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और समुद्री परिवहन से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

दुनिया के तेल बाजार पर असर 
होर्मुज में जारी प्रतिबंधों और सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में रुकावट आती है। इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एशिया और यूरोप के कई देशों में ऊर्जा की कीमतों पर भी पड़ता है।भारत को मिली छूट से भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए एक वैकल्पिक राहत का रास्ता बन सकता है। हालांकि, इससे वैश्विक तेल संकट तत्काल समाप्त नहीं होगा, क्योंकि दूसरे देशों के जहाजों और व्यापक समुद्री यातायात पर प्रतिबंधों का असर बना हुआ है।

 

ईरान का संदेश  
ईरान के इस फैसले के पीछे एक बड़ा कूटनीतिक संदेश भी छिपा है। तेहरान यह दिखाना चाहता है कि मौजूदा संघर्ष के बीच वह उन देशों के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध बनाए रखने को तैयार है, जिनके साथ उसके पारस्परिक हित जुड़े हैं। भारत के मामले में दवाओं की जरूरत और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं चीन के मामले में राजनीतिक समर्थन की अपेक्षा इस फैसले को और रणनीतिक बना देती है। 

 

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