भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर तेज हुई रफ्तार, सरकार ने बताई पूरी बात

Edited By Updated: 16 Feb, 2026 10:45 PM

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद अब प्रक्रिया दस्तावेज़ी चरण में प्रवेश कर चुकी है। संकेत मिल रहे हैं कि यदि अंतिम कानूनी बिंदुओं पर सहमति बन जाती है तो...

नेशनल डेस्क : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद अब प्रक्रिया दस्तावेज़ी चरण में प्रवेश कर चुकी है। संकेत मिल रहे हैं कि यदि अंतिम कानूनी बिंदुओं पर सहमति बन जाती है तो मार्च 2026 में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर संभव हैं।

वाशिंगटन में कानूनी मसौदे पर होगी निर्णायक चर्चा

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारतीय अधिकारियों का एक उच्चस्तरीय दल अगले सप्ताह अमेरिका रवाना होगा। यह टीम 23 फरवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में वाशिंगटन में अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बैठक करेगी। दौरे का मुख्य उद्देश्य समझौते के कानूनी पाठ (लीगल टेक्स्ट) को अंतिम रूप देना है, ताकि दोनों देशों के बीच सहमति से तैयार मसौदा औपचारिक दस्तावेज़ का रूप ले सके। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई संयुक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। दोनों देशों के बीच पहले से वर्चुअल माध्यम से लगातार बातचीत चल रही है, लेकिन आमने-सामने की बैठकों को अंतिम सहमति के लिए अहम माना जा रहा है।

रूपरेखा तय, अब समझौते को मिलेगा औपचारिक स्वरूप

इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने एक साझा बयान जारी कर संकेत दिया था कि अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार हो चुका है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि अब प्राथमिकता उस रूपरेखा को ठोस कानूनी दस्तावेज़ में बदलने की है, जिस पर दोनों सरकारें हस्ताक्षर कर सकें। सरल शब्दों में कहें तो बातचीत की दिशा और दायरा पहले ही तय हो चुका है, अब उन बिंदुओं को विधिक भाषा में परिभाषित किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की व्याख्या संबंधी अस्पष्टता न रहे।

मार्च लक्ष्य, लेकिन लचीलापन बरकरार

सरकार का प्रयास है कि समझौते को मार्च 2026 तक अंतिम रूप दे दिया जाए। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जटिल कानूनी और तकनीकी पहलुओं को देखते हुए कोई सख्त समयसीमा घोषित नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वाशिंगटन में प्रस्तावित वार्ता सुचारु रूप से आगे बढ़ती है तो मार्च में समझौते की घोषणा संभव है। अन्यथा, प्रक्रिया को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल दोनों देश इस डील को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।

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