Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Aug, 2026 04:04 PM

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की। उन्होंने हाल के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान उनके ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को माफ़ करने का फ़ैसला किया था। पार्टी ने उनके इस रवैये को राजनेता की समझदारी...
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की। उन्होंने हाल के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान उनके ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को माफ़ करने का फ़ैसला किया था। पार्टी ने उनके इस रवैये को राजनेता की समझदारी और दयालु नेतृत्व का उदाहरण बताया।
पार्टी नेताओं ने उनके इस रवैये की तुलना इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के समय राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के तरीक़े से भी की। नेताओं ने कहा कि जहां इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी, वहीं पीएम मोदी ने बदले की भावना के बजाय सही रास्ता दिखाने का फैसला किया।यह बात प्रधानमंत्री मोदी के अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो मैसेज जारी करने के एक दिन बाद कही गई। उन्होंने कहा कि वह बस देश के युवाओं से सीधे बात करना चाहते थे।
NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध-प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ "शरारती युवाओं" ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जो किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि न सिर्फ़ उन्हें निशाना बनाया गया, बल्कि उनकी दिवंगत मां के लिए भी बहुत बुरी बातें कहीं गईं। लोगों की कड़ी प्रतिक्रिया को समझते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गलतियाँ बचपन का हिस्सा होती हैं और बचपन ही उन गलतियों को सुधारने का मौका भी देता है।
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि वह उन्हें माफ़ करना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि समाज इस भावना को स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा कि उनके दिल में सिर्फ़ एक ही भावना है।
प्रधानमंत्री के मैसेज पर प्रतिक्रिया देते हुए BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, "यह वाकई बहुत बड़ी बात है। हमारे प्रधानमंत्री का दिल बहुत बड़ा है। कोई भी ऐसे ही नरेंद्र मोदी नहीं बन जाता। जंतर-मंतर पर युवाओं के एक गुट ने उनकी मां के खिलाफ भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने उनके खिलाफ कई तरह के अपमानजनक और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
"फिर भी, प्रधानमंत्री ने अपना वीडियो मैसेज जारी किया और कहा, 'वे बच्चे हैं। यह उनकी नादानी है। उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था, लेकिन वे हमारे ही बच्चे हैं।' जिस तरह से उन्होंने उनसे अपील की कि वे अपशब्दों का रास्ता छोड़ दें और देश के निर्माण में योगदान दें, ऐसा कोई राजनेता ही कर सकता है।" राजनीतिक अतीत से तुलना करते हुए शाहदेव ने आगे कहा, "इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए भी ऐसे ही विरोध-प्रदर्शन हुए थे; लेकिन उन्होंने इमरजेंसी लगाकर जवाब दिया था। दूसरी ओर, हमारे प्रधानमंत्री ने छात्रों को माफ़ कर दिया है और उन्हें सही रास्ता दिखाया है।" हमें उन पर गर्व है।"
बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने भी प्रधानमंत्री की बातों की तारीफ़ करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री ने कल सिर्फ़ प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि देश के बच्चों के अभिभावक के तौर पर बात की। उन्होंने एक राजनेता की तरह व्यवहार किया और बड़ा दिल दिखाया, जबकि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी दिवंगत माँ के लिए भी अपशब्द कहे गए थे। प्रधानमंत्री ने उन छात्रों को माफ़ कर दिया है जिन्होंने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।" बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रधानमंत्री को "असाधारण रूप से बड़े और दयालु दिल" वाले नेता के तौर पर बताया।
सरावगी ने कहा, "छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान, पूरे देश ने देखा कि छात्र कितनी अश्लील और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। यह बिल्कुल साफ़ था कि ये बातें न सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए थीं, बल्कि उनकी दिवंगत माँ के लिए भी थीं। प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के लिए जिस तरह की अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह इतनी आपत्तिजनक थी कि सभ्य समाज में उसे दोहराया या सुना भी नहीं जा सकता। फिर भी, हमारे प्रधानमंत्री ने उन्हें सही रास्ता दिखाया है और माफ़ कर दिया है।"
वरिष्ठ बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया ने नेतृत्व और सार्वजनिक व्यवहार के बारे में एक बड़ा संदेश दिया। नकवी ने कहा, "यह सभी के लिए एक सबक और संदेश है। एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी की संवेदनशीलता है, और दूसरी तरफ़ कुछ लोगों का सामंती अहंकार है। जहाँ एक तरफ़ संवेदनशीलता होती है, वहीं दूसरी तरफ़ ऐसा अहंकार भी होता है।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री लगातार एक "गाली देने वाले गिरोह" (abuse gang) के निशाने पर रहे हैं। नकवी ने दावा किया, "पीएम मोदी शुरू से ही इस 'गाली देने वाले गिरोह' के निशाने पर रहे हैं। इस 'गाली देने वाले गिरोह' ने बार-बार समाज के अलग-अलग वर्गों - कभी युवा, कभी किसान, कभी महिलाएं और कभी छात्र - का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर करने की कोशिश की है, ताकि वे आपराधिक साज़िशों को अंजाम दे सकें और देश की छवि व प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकें।"