Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Aug, 2026 12:11 PM

पीएम मोदी ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में उन छात्रों को माफ करने की बात कही थी, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। इस पर दिपके ने पूछा कि क्या सिर्फ सोशल मीडिया वीडियो में माफी दी जाएगी या...
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने सवाल उठाए हैं। पीएम मोदी ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में उन छात्रों को माफ करने की बात कही थी, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। इस पर दिपके ने पूछा कि क्या सिर्फ सोशल मीडिया वीडियो में माफी दी जाएगी या प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लिए जाएंगे। दिपके ने पीएम मोदी के इंस्टाग्राम पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, "सिर्फ रील पर ही माफ करोगे या केस भी वापस लोगे?"
पीएम मोदी ने गाली-गलौज करने वाले छात्रों को किया माफ
पीएम मोदी ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा था कि कुछ युवाओं ने उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया और उनकी दिवंगत मां को भी लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज से किसी समस्या का समाधान नहीं होता और वह ऐसे युवाओं को माफ करना चाहते हैं। पीएम मोदी ने अपील की कि भटके हुए युवाओं को सही रास्ता दिखाने की जरूरत है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कुछ छात्रों पर केस दर्ज किए जाने को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ है। CJP नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कार्रवाई कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। संगठन ने मांग की है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा की जाए।
नोएडा की नाबालिग छात्रा का मामला चर्चा में
मामला तब और सुर्खियों में आया जब नोएडा की एक नाबालिग छात्रा के खिलाफ प्रधानमंत्री के लिए कथित आपत्तिजनक नारे लगाने को लेकर FIR दर्ज की गई। बाद में छात्रा ने एक वीडियो जारी कर माफी मांगी और कहा कि वह दूसरों के प्रभाव में आ गई थी। छात्रा ने खुद को 15 साल का बताते हुए अपनी गलती स्वीकार की और इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताया।
दिपके ने उठाए 'दो कानून' के सवाल
अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि नेताओं और आम लोगों के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के लिए कार्रवाई होती है, तो राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों के पुराने बयानों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में युवाओं और नेताओं के लिए अलग-अलग कानून लागू होते हैं।