जम्मू कश्मीर में जम्मू की अदालतों में सबसे अधिक करीब 78000 मामले हैं लंबित

Edited By Updated: 24 Feb, 2026 06:27 PM

jammu courts have the highest number of pending cases in j k around 78 000

जम्मू-कश्मीर की अधीनस्थ अदालतों में जनवरी के अंत तक 3,89,210 मामले लंबित हैं, जिनमें से लगभग दो-तिहाई मामले आपराधिक हैं और 58,000 से अधिक मामले पांच से 30 वर्ष पुराने हैं। आधिकारिक आंकड़े से यह जानकारी सामने आयी है। अधिकारियों ने बताया कि...

नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर की अधीनस्थ अदालतों में जनवरी के अंत तक 3,89,210 मामले लंबित हैं, जिनमें से लगभग दो-तिहाई मामले आपराधिक हैं और 58,000 से अधिक मामले पांच से 30 वर्ष पुराने हैं। आधिकारिक आंकड़े से यह जानकारी सामने आयी है। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए सरकार न्यायिक रिक्तियां भरने के प्रयास के साथ साथ सक्रिय रूप से कई उपाय कर रही है, यह बात हाल में विधानमंडल में एक प्रश्न के लिखित जवाब से सामने आयी है। राज्य के बीस जिलों में से जम्मू में सबसे अधिक 77,992 मामले लंबित हैं, जिनमें एक हजार से अधिक मामले 15 से 30 साल पुराने हैं। यह श्रीनगर से अधिक है, जहां 62,785 मामले लंबित हैं।

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक पिछले 30 वर्षों में जम्मू और कश्मीर के 232 जिला और अन्य निचली अदालतों में 3,89,210 मामले लंबित हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि इनमें से 2,40,718 (62 प्रतिशत) मामले आपराधिक मुकदमेबाजी के हैं जबकि 1,48,492 मामले दीवानी मुकदमे हैं। आपराधिक मुकदमे दीवानी मुकदमों से 92,000 अधिक हैं। वर्षवार मुकदमों के विश्लेषण से पता चलता है कि लंबित मामलों की संख्या हाल ही में दायर किए गए मामलों की वजह से अधिक हैं जो नए मुकदमों के निरंतर प्रवाह का संकेत देता है।

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रिपोर्ट में कहा गया है, ''कुल मामलों में से 60 प्रतिशत से अधिक यानी 2,38,373 मामले एक वर्ष से कम पुराने हैं। मध्यम अवधि के मामलों में, 36,849 मामले तीन से पांच वर्षों से लंबित हैं, 25,746 मामले पांच से सात वर्षों से और 20,732 मामले सात से दस वर्षों से लंबित हैं।'' अधिकारियों ने बताया कि कुल मिलाकर, ये आंकड़े जम्मू और कश्मीर की न्यायिक प्रणाली के सामने दोहरी चुनौती को उजागर करते हैं - नए मामलों की निरंतर बढ़ती संख्या को संभालना और साथ ही काफी समय से लंबित विवादों को धीरे धीरे करके निस्तारित करना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लंबित मामले पूरे देश में एक चुनौती बने हुए हैं और इस केंद्र शासित प्रदेश में कानूनी प्रक्रिया में सुधार लाने एवं लंबित मामलों को काफी हद तक कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, खासकर सरकारी मुकदमों में। 

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