Edited By jyoti choudhary,Updated: 24 Feb, 2026 05:05 PM

केंद्र सरकार ने जूट किसानों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹275 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹5,925 कर दिया है। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री Ashwini...
बिजनेस डेस्कः केंद्र सरकार ने जूट किसानों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹275 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹5,925 कर दिया है। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कैबिनेट बैठक के बाद दी। सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी का मकसद किसानों की आय में सुधार और जूट उत्पादन को प्रोत्साहन देना है।
सरकार ने दोहराया कि MSP तय करने में वही फॉर्मूला अपनाया गया है, जिसके तहत किसानों को अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक मूल्य सुनिश्चित किया जाता है। इस फैसले से जूट उत्पादक किसानों को बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल, असम और बिहार जैसे पूर्वी राज्यों में बड़ी संख्या में किसान जूट की खेती पर निर्भर हैं, ऐसे में यह कदम उनके लिए अहम माना जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में कच्चे जूट का MSP 2,400 रुपए प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर ₹5,925 हो गया है यानी पिछले एक दशक में MSP में करीब ढाई गुना वृद्धि हुई है। 2004-05 से 2013-14 के बीच जूट किसानों को MSP के तहत कुल ₹441 करोड़ का भुगतान हुआ था, जबकि 2014-15 से 2025-26 के दौरान यह राशि बढ़कर ₹1,342 करोड़ तक पहुंच गई।
सरकार ने बताया कि मूल्य समर्थन संचालन की जिम्मेदारी Jute Corporation of India को दी गई है। यदि बाजार भाव MSP से नीचे जाता है, तो JCI सीधे किसानों से खरीद करेगी। इस प्रक्रिया में होने वाले किसी भी वित्तीय नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार करेगी।
कच्चे जूट के अन्य ग्रेड और किस्मों का MSP, TD-3 ग्रेड के आधार पर तय किया जाएगा, जिससे पूरे सेक्टर में मूल्य संतुलन बना रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में यह बढ़ोतरी किसानों को बाजार की अस्थिरता से सुरक्षा देगी, जूट की खेती को बढ़ावा देगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।