Edited By jyoti choudhary,Updated: 24 Feb, 2026 01:48 PM

अमेरिका से शुरू हुए टैरिफ और प्रतिबंधों के माहौल के बीच अब एशिया में एक नया व्यापारिक तनाव उभर आया है। जापान की प्रधानमंत्री के ताइवान को लेकर दिए गए बयान के बाद चीन ने सख्त कदम उठाते हुए 40 जापानी कंपनियों पर कार्रवाई की है। चीन ने
बिजनेस डेस्कः अमेरिका से शुरू हुए टैरिफ और प्रतिबंधों के माहौल के बीच अब एशिया में एक नया व्यापारिक तनाव उभर आया है। जापान की प्रधानमंत्री के ताइवान को लेकर दिए गए बयान के बाद चीन ने सख्त कदम उठाते हुए 40 जापानी कंपनियों पर कार्रवाई की है। चीन ने 20 कंपनियों को निर्यात नियंत्रण (कंट्रोल) सूची में और 20 अन्य को निगरानी सूची में डाल दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव का संकेत माना जा रहा है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मामला तब गरमाया जब जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi की ताइवान को लेकर की गई पुरानी टिप्पणियों पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई। ताइवान एक स्व-शासित द्वीप है, जिस पर China अपना दावा करता है। चीन ने आरोप लगाया कि ताइवान मुद्दे पर जापान की टिप्पणी उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान है।
किन कंपनियों पर गिरी गाज?
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, निर्यात नियंत्रण सूची में शामिल 20 कंपनियों को चीनी निर्यातक अब “डुअल-यूज” (नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों में इस्तेमाल होने वाली) वस्तुएं नहीं बेच सकेंगे।
निशाने पर आई प्रमुख कंपनियों में...
- Mitsubishi Heavy Industries और इसकी अनुषंगी इकाइयां
- Kawasaki Heavy Industries
- Fujitsu के कुछ प्रभाग
इन कंपनियों का संबंध जहाज निर्माण, विमान इंजन, समुद्री मशीनरी और तकनीकी उपकरणों से है।
निगरानी सूची में कौन?
दूसरी सूची में शामिल 20 कंपनियों को चीनी निर्यातकों से सामान लेने के लिए विशेष निर्यात लाइसेंस, जोखिम आकलन रिपोर्ट और यह लिखित आश्वासन देना होगा कि वस्तुओं का उपयोग जापान की सेना द्वारा नहीं किया जाएगा।
इस सूची में....
- Subaru Corporation
- Mitsubishi Materials Corporation
- Institute of Science Tokyo
चीन का क्या कहना है?
चीन के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि ये कदम जापान के “पुनः सैन्यीकरण” और संभावित परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं और पूरी तरह वैध हैं। हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ये उपाय सीमित दायरे में हैं और सामान्य चीन-जापान व्यापार पर व्यापक असर नहीं पड़ेगा।
रिश्तों पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान को लेकर संवेदनशीलता पहले से ही क्षेत्रीय राजनीति का अहम मुद्दा रही है। ऐसे में यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में और तनाव बढ़ा सकता है। चीन ताइवान को अपना अलग हुआ प्रांत मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की बात भी कह चुका है। ताइवान की संप्रभुता के समर्थन में किसी भी विदेशी टिप्पणी पर चीन आमतौर पर कड़ा रुख अपनाता है।