जानिए कौन है रेवती जिसके एक बयान पर 9 पुलिसकर्मियों मिली मौत की सजा?, पढ़ें पिता-पुत्र को टॉर्चर करने की पूरी कहानी!

Edited By Updated: 09 Apr, 2026 06:51 PM

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मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस कस्टडी के दौरान पिता-पुत्र को टॉर्चर करने और उनकी हत्या के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले में हेड कॉन्स्टेबल रेवती की महत्वपूर्ण भूमिका है उनकी साहसिक गवाही ने ही इस मामले को निर्णायक...

नेशनल डेस्क: मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस कस्टडी के दौरान पिता-पुत्र को टॉर्चर करने और उनकी हत्या के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले में हेड कॉन्स्टेबल रेवती की महत्वपूर्ण भूमिका है उनकी साहसिक गवाही ने ही इस मामले को निर्णायक मोड़ दिया। जिससे कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। 

दरअसल,तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के चर्चित साथनकुलम कस्टोडियल डेथ केस में पांच साल बाद अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। मद्रास हाईकोर्ट ने मामले में दोषी पाए गए नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। इस फैसले में एक महिला पुलिसकर्मी की गवाही निर्णायक साबित हुई।

ड्यूटी के दौरान बनीं अहम गवाह
घटना के समय ड्यूटी पर तैनात महिला हेड कॉन्स्टेबल रेवती ने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से अदालत के सामने रखा। उन्होंने बिना किसी दबाव में आए हिरासत में हुई मारपीट और अमानवीय व्यवहार का खुलासा किया, जो केस में अहम मोड़ साबित हुआ।

क्रूरता का किया खुलासा
रेवती के बयान के अनुसार, हिरासत में लिए गए पी जयराज और उनके बेटे जे बेनिक्स के साथ गंभीर मारपीट की गई। उन्होंने बताया कि दोनों को बेरहमी से पीटा गया और उन्हें लगातार शारीरिक यातनाएं दी गईं। यह खुलासे इस मामले की गंभीरता को उजागर करने वाले रहे।

दबाव और धमकियों के बीच बयान
सच्चाई सामने लाने के दौरान रेवती को भारी दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने पीछे हटने से इनकार किया और मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया। उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम भी किए गए थे।

न्याय की दिशा में बड़ा कदम
रेवती की गवाही और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई। यह फैसला न केवल इस मामले में न्याय दिलाने की दिशा में अहम है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर भी एक मजबूत संदेश देता है। यह मामला देशभर में पहले ही व्यापक चर्चा का विषय बन चुका था और अब अदालत के इस फैसले के बाद एक बार फिर न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है।
 

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