'उन्हें बोलने दीजिए… जहां हैं वहां मौका नहीं मिलता', पीएम मोदी ने ली TMC सांसद की चुटकी तो सदन में लगे ठहाके

Edited By Updated: 16 Apr, 2026 06:05 PM

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लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान गुरुवार को राजनीतिक माहौल उस समय गर्म हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। दरअसल, पीएम मोदी के चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण...

नेशनल डेस्क: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान गुरुवार को राजनीतिक माहौल उस समय गर्म हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। दरअसल, पीएम मोदी के चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी बार-बार अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे थे, जिससे सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। 

उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता
इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें बोलने दिया जाए, क्योंकि जहां वे हैं, वहां उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ क्षणों के लिए हंसी और हलचल का माहौल बन गया। प्रधानमंत्री का यह तंज सीधे तौर पर विपक्षी दल की आंतरिक स्थिति पर इशारा करता नजर आया, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चल रही बहस के बीच इस तरह की टिप्पणियों ने सियासी माहौल को और भी गरमा दिया।

संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित
वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में परिसीमन के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होने का आश्वासन देते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की और कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। मोदी ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर अपने विचार रखते हुए यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए और इसका श्रेय वह विपक्षी दलों को भी देने को तैयार हैं।

 जिसने विरोध किया महिलाएं उन्हें माफ नहीं करेंगी 
उन्होंने कहा, ''हमारे देश में जबसे महिला आरक्षण को लेकर चर्चा शुरू हुई है और जब-जब चुनाव आया है, जिस दल ने महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया।'' मोदी ने कहा, ''2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सब ने (2023 में) सहमति से इसे (महिला आरक्षण विधेयक) पारित किया था। किसी का राजनीतिक फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान नहीं हुआ।'' उन्होंने कहा, ''अगर हम सब साथ में रहेंगे तो इतिहास गवाह है कि यह किसी के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा, देश के लोकतंत्र और सामूहिक निर्णय के पक्ष में जाएगा। जिन्हें इसमें राजनीति की बू आ रही है। वे खुद के 30 साल के परिणामों को देख लें। उनका इसमें ही फायदा है। नुकसान से बच जाएंगे। राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं। जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

सर्व सम्मति से इसे पारित करें
प्रधानमंत्री ने कहा, ''2024 में यह संभव नहीं था। इतने कम समय में नहीं हो पाता। अगर हम 2029 (के लोकसभा चुनाव) में इसे लागू कर सकते हैं, तब भी नहीं करेंगे तो महिलाओं में विश्वास नहीं बना पाएंगे कि सच में प्रयास कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा, ''मेरा आग्रह है कि यह अवसर है कि पुरानी जो भी मुश्किलें रहीं, उनसे बाहर निकलें। हिम्मत से आगे बढ़ें। और नारी शक्ति की राष्ट्र के विकास में सहभागिता सुनिश्चित करें तथा इस विधेयक को सर्व सम्मति से इसे पारित करें।

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