जीवनसाथी का साथ छूटा तो शरीर होगा तेजी से बूढ़ा! रिसर्च में खुलासा- अकेलेपन से 12 साल तक कम हो सकती है आपकी जवानी

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 09:05 AM

loneliness can shorten your youth by 12 years

इजरायल की बार-इलान यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन ने भारत के बुजुर्गों की सेहत को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। शोध के अनुसार जीवनसाथी को खोने वाले (विधवा/विधुर) बुजुर्गों की शारीरिक और मानसिक सेहत, शादीशुदा बुजुर्गों के मुकाबले तेजी...

Ageing Alert : इजरायल की बार-इलान यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन ने भारत के बुजुर्गों की सेहत को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। शोध के अनुसार जीवनसाथी को खोने वाले (विधवा/विधुर) बुजुर्गों की शारीरिक और मानसिक सेहत, शादीशुदा बुजुर्गों के मुकाबले तेजी से गिर रही है। अकेलापन न केवल डिप्रेशन बढ़ा रहा है बल्कि शरीर की 'बायोलॉजिकल क्लॉक' को भी समय से पहले बुढ़ापे की ओर धकेल रहा है।

क्या कहता है हेल्थ स्कोर?

अध्ययन में 45 साल से अधिक उम्र के 64,500 नागरिकों को शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने 'हेल्दी एजिंग इंडेक्स' (HAI) के आधार पर सेहत को 100 अंकों में मापा:

भारत में एकाकी जीवन का संकट

सर्वे के अनुसार भारत में करीब 23% बुजुर्ग बिना जीवनसाथी के रह रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसी है जो परिवार या दोस्तों के अभाव में पूरी तरह एकाकी जीवन बिता रहे हैं। शोध में पाया गया कि जीवनसाथी के न होने पर भारतीय बुजुर्ग सामाजिक गतिविधियों (जैसे शादियों, कम्युनिटी मीटिंग या उत्सवों) में हिस्सा लेना बंद कर देते हैं जिससे उनकी सेहत और ज्यादा खराब होने लगती है।

बुढ़ापे को मात देने वाली 7 संजीवनी गतिविधियां

अध्ययन ने उन 7 आदतों की पहचान की है जो बुजुर्गों को लंबे समय तक जवान और स्वस्थ रख सकती हैं:

  1. रिश्तेदारों और पुराने दोस्तों से नियमित मिलना।

  2. धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी।

  3. पार्क या प्राकृतिक स्थलों पर सुबह-शाम टहलना।

  4. योग, हल्के खेल या मॉर्निंग वॉक।

  5. कभी-कभी रेस्टोरेंट जाकर बाहर भोजन करना।

  6. सिनेमा देखना या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जाना।

  7. कम्युनिटी मीटिंग या मोहल्ला बैठकों में हिस्सा लेना।

महिलाओं के लिए ज्यादा चुनौतियां

रिसर्च के अनुसार महिलाओं के लिए अकेलेपन का यह दौर ज्यादा कठिन होता है। राजस्थान के जयपुर में 'गिल्ड ऑफ सर्विस' जैसी संस्थाएं विधवा महिलाओं को इस मानसिक जाल से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग और स्वरोजगार (सिलाई, हस्तशिल्प) से जोड़ रही हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ऐसे बुजुर्गों को समय पर सामाजिक समर्थन मिले तो वे अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव को गरिमा और बेहतर स्वास्थ्य के साथ जी सकते हैं।

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