पेट्रोलियम कंपनियों को झटका, पेट्रोल निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला, डीजल और ATF पर राहत

Edited By Updated: 16 May, 2026 11:37 AM

major government decision on petrol exports relief on diesel and atf

पेट्रोल और डीजल पर आम जनता को झटका देने के बाद अब सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों के मुनाफे पर भी बड़ा झटका दिया है। सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों के विदेशी मुनाफे पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर 3 रुपए प्रति लीटर का...

बिजनेस डेस्कः पेट्रोल और डीजल पर आम जनता को झटका देने के बाद अब सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों के मुनाफे पर भी बड़ा झटका दिया है। सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों के विदेशी मुनाफे पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर 3 रुपए प्रति लीटर का विंडफॉल गेन्स टैक्स लगा दिया है। यह नई दरें 16 मई से लागू हो गई हैं।  

डीजल और ATF पर राहत 

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, अब विदेशों में पेट्रोल एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को प्रति लीटर 3 रुपए का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) देना होगा। सरकार ने पहली बार पेट्रोल पर SAED टैक्‍स लगाया है। हालांकि, सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर राहत देते हुए एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती की है। डीजल पर लेवी घटाकर 16.5 रुपए प्रति लीटर और जेट फ्यूल पर 16 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है।

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही पेट्रोल और डीजल के एक्सपोर्ट पर रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी शून्य रखा गया है।

गौरतलब है कि सरकार समय-समय पर विंडफॉल टैक्स की समीक्षा कर रही है। इससे पहले 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपए प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपए प्रति लीटर की ड्यूटी लगाई गई थी। बाद में 11 अप्रैल को इन दरों में बढ़ोतरी कर क्रमशः 55.5 रुपए और 42 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया था। 30 अप्रैल को सरकार ने इन दरों को घटाकर 23 रुपए और 33 रुपए प्रति लीटर कर दिया था।

100 डॉलर के पार कच्चा तेल

विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पिछले एक सप्ताह से कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जबकि युद्ध से पहले इसकी कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी।

सरकार का कहना है कि विंडफॉल टैक्स लगाने का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कंपनियों को वैश्विक कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है।

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क्‍यों लगाना पड़ा SAED टैक्‍स

भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी क्रूड ऑयल आयात करता है लेकिन भारत इस कच्‍चे तेल को रिफाइन करके बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का निर्यात भी करता है। केप्‍लर की ओर से जारी आंकड़ों में देखें तो साल 2025 में भारत ने करीब 4 लाख बैरल पेट्रोल और 6 लाख बैरल डीजल का निर्यात किया था। जनवरी से नवंबर तक भारत को पेट्रोलियम उत्‍पादों के निर्यात से 52 अरब डॉलर की कमाई हुई थी। यह पैसा भारतीय रिफाइनरियों को मिलता है। सरकार ने इस निर्यात को कम करने और पेट्रोलियम उत्‍पाद को देश में ही रोके रखने के लिए यह टैक्‍स लगाया है।

SAED क्या है?

सरकार यह टैक्स हर दो हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की औसत कीमतों के आधार पर तय करती है। जब ग्लोबल कीमतें ऊपर जाती हैं तो रिफाइनरियों को निर्यात में भी मुनाफा दिखता है और वे देश की बजाय बाहर ज्यादा ईंधन भेजने लगती हैं। इससे घरेलू आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। SAED निर्यात को महंगा करके इसी को रोकती है जब प्राइस नरम पड़ते हैं तो SAED भी घटा दी जाती है।  
 

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