CBSE का बड़ा फैसला: अब 9वीं के छात्रों को पढ़नी होंगी 3 भाषाएं, सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई हरी झंडी

Edited By Updated: 15 Jul, 2026 02:54 PM

major decision by cbse class 9 students will now have to study three languages

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। Supreme Court ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जाने वाली 'त्रिभाषा नीति' (Three-Language...

नेशनल डेस्क। सीबीएसई (CBSE) बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। Supreme Court ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जाने वाली 'त्रिभाषा नीति' (Three-Language Formula) पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।

इस नीति के तहत अब नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा जिसमें से कम से कम दो भाषाएं भारत की मूल (स्थानीय) भाषाएं होनी चाहिए। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह त्रिभाषा नीति क्या है, इसके नियम क्या हैं और इससे छात्रों को क्या फायदे होंगे?

जानें क्या है CBSE का त्रिभाषा फॉर्मूला?

यह फॉर्मूला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। सत्र 2026-27 से नौवीं कक्षा के सभी छात्रों को दो के बजाय तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। यह नियम देश के सभी सरकारी और प्राइवेट सीबीएसई स्कूलों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा। छात्र अपनी पसंद की भाषा चुनने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होंगे उन पर कोई भी भाषा जबरन थोपी नहीं जाएगी।

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कैसे करें भाषा का चुनाव? 

तीसरी भाषा चुनने का गणित बहुत सीधा है। छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाओं को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना ही होगा:

उदाहरण 'क': यदि कोई छात्र पहली दो भाषाओं के रूप में हिंदी और तमिल (दोनों भारतीय भाषाएं) पढ़ रहा है तो वह तीसरी भाषा के रूप में कोई अन्य भारतीय भाषा (जैसे संस्कृत) या विदेशी भाषा (जैसे अंग्रेजी या फ्रेंच) चुन सकता है।

उदाहरण 'ख': यदि कोई छात्र पहले से तमिल और अंग्रेजी पढ़ रहा है तो उसके पास एक भारतीय और एक विदेशी भाषा पहले से है। ऐसे में नियम के मुताबिक उसे तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य रूप से कोई भारतीय भाषा (जैसे हिंदी, कन्नड़, गुजराती आदि) ही चुननी होगी।

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3. विदेशी भाषाओं और 10वीं के छात्रों के लिए नियम

विदेशी भाषाओं का विकल्प: दो भारतीय भाषाओं के साथ छात्र अंग्रेजी, कोरियन, जापानी, फ्रेंच, जर्मन या स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं का विकल्प चुन सकते हैं। ध्यान रहे यदि कोई छात्र अंग्रेजी चुनता है तो वह किसी अन्य विदेशी भाषा का विकल्प नहीं ले सकेगा। 10वीं के छात्रों को राहत: सत्र 2026-27 के दौरान जो छात्र सीधे 10वीं कक्षा में हैं उन पर यह नया नियम लागू नहीं होगा। वे अपनी पुरानी व्यवस्था (दो भाषाओं) के तहत ही बोर्ड परीक्षा देंगे। यह नियम अभी केवल 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए है।

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4. कौन-सी भाषाएं हैं विकल्प में शामिल?

भारतीय भाषाएं (Indian Languages),                                  विदेशी भाषाएं (Foreign Languages)
हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, 
मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओड़िया, असामी आदि।,        अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी, स्पेनिश, जापानी, कोरियन आदि। 

5. कैसे होगा तीसरी भाषा का मूल्यांकन और परीक्षा?

छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का तनाव न बढ़े इसके लिए मूल्यांकन की प्रक्रिया को बहुत आसान रखा गया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नौवीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों की तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा। जब ये बच्चे अगले साल (सत्र 2027-28) 10वीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा देंगे तब सीबीएसई इस तीसरी भाषा के लिए कोई अलग से लिखित बोर्ड परीक्षा नहीं लेगा। सीबीएसई और एनसीईआरटी (NCERT) आपसी समन्वय से इस तीसरी भाषा के प्रदर्शन के आधार पर छात्रों को सर्टिफिकेट में अलग से ग्रेड प्रदान करेंगे।

6. त्रिभाषा नीति की आवश्यकता क्यों?

बता दें कि इस फॉर्मूले को सबसे पहले साल 1964-66 में कोठारी शिक्षा आयोग द्वारा पेश किया गया था। बाद में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्वीकार किया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य स्कूली स्तर पर बच्चों को बहुभाषी बनाना है। अलग-अलग राज्यों की भाषाएं सीखने से देश के युवाओं में सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ेगा और राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी।

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