बच्चे की मौत का ऐसा गम! कुत्ते ने बंदर के बच्चे को मारा, मां खाना-पीना छोड़ 5 दिन तक पोल पर गुमसुम बैठी

Edited By Updated: 30 Jan, 2026 11:01 PM

monkey emotional story

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से मां की ममता को झकझोर देने वाली एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है। बिठूर थाना क्षेत्र के मंधना बाजार में एक मादा बंदर अपने बच्चे की दर्दनाक मौत के बाद गहरे सदमे में चली गई।

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से मां की ममता को झकझोर देने वाली एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है। बिठूर थाना क्षेत्र के मंधना बाजार में एक मादा बंदर अपने बच्चे की दर्दनाक मौत के बाद गहरे सदमे में चली गई। बच्चे को बचाने में नाकाम रहने का दुख ऐसा था कि मादा बंदर ने पांच दिनों तक न खाना खाया, न पानी पिया और एक ऊंचे बिजली के पोल पर बैठी रही।

आवारा कुत्तों के हमले में गई जान, मां देखती रह गई बेबस

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ दिन पहले मंधना बाजार में आवारा कुत्तों के झुंड ने एक छोटे बंदर पर हमला कर दिया। मादा बंदर ने बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कुत्तों की संख्या ज्यादा होने के कारण वह उसे नहीं बचा सकी। बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे मां पूरी तरह टूट गई।

फल-पानी ठुकराकर गुमसुम बैठी रही, लोग हुए भावुक

बच्चे की मौत के बाद मादा बंदर बाजार में लगे बिजली के पोल पर चढ़ गई और वहीं बैठी रही। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों ने उसे केले, फल, पानी और अन्य खाने की चीजें देने की बार-बार कोशिश की। डंडों के सहारे फल ऊपर तक पहुंचाए गए, आवाज लगाई गई, लेकिन मादा बंदर ने कुछ भी स्वीकार नहीं किया। वह बस उदास आंखों से नीचे देखती रही, मानो अपने बच्चे को ढूंढ रही हो।

बारिश, ठंड और भूख की परवाह नहीं, जगह नहीं छोड़ी

पांच दिनों तक मादा बंदर ने न तो जगह बदली और न ही नीचे उतरी। बारिश और मौसम की परवाह किए बिना वह उसी पोल पर बैठी रही। यहां तक कि बंदरों का एक झुंड भी वहां पहुंचा, लेकिन उसने किसी के साथ जाने से इनकार कर दिया। इस दृश्य को देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

फायर ब्रिगेड ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, बचाई गई जान

शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने तुरंत फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया। कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने मादा बंदर को सुरक्षित नीचे उतारा। समय रहते रेस्क्यू होने से उसकी जान बच गई, जिससे इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली।

जानवरों में भी उतनी ही गहरी होती है मां की ममता

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मां का प्यार सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होता। जानवरों में भी ममता, दर्द और लगाव उतना ही गहरा होता है। ऐसे मामलों में वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण टीमों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है, ताकि जानवरों को समय पर मदद मिल सके।
 

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