Edited By Tanuja,Updated: 17 Mar, 2026 07:22 PM

मिडिल ईस्ट संकट के कारण ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने पर भारत ने पड़ोसी देशों को अतिरिक्त ईंधन देने के अनुरोधों पर विचार शुरू किया है। बांग्लादेश और नेपाल ने मांग बढ़ाई है, लेकिन भारत फिलहाल अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर सीमित आपूर्ति बनाए हुए है।
International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तेल आपूर्ति में बाधा के बीच भारत की भूमिका अब पूरे दक्षिण एशिया के लिए अहम बनती जा रही है। पड़ोसी देशों में संभावित ईंधन संकट को देखते हुए भारत ने अतिरिक्त सप्लाई के अनुरोधों पर विचार शुरू किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश (Bangladesh) ने भारत से मौजूदा समझौते के तहत मिलने वाले 1.8 लाख टन डीजल के अलावा अतिरिक्त ईंधन की मांग की है।
वहीं नेपाल (Nepal) ने Indian Oil Corporation से 3,000 टन अतिरिक्त LPG की मांग की, लेकिन फिलहाल भारत ने तय मात्रा से ज्यादा सप्लाई देने से इंकार कर दिया है। नेपाल को मौजूदा समझौते के तहत हर महीने करीब 48,000 टन LPG मिलती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) ने कहा कि भारत इन अनुरोधों की समीक्षा कर रहा है और फैसला अपनी ऊर्जा जरूरतों और उपलब्धता को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
भारत की रणनीति
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और Strait of Hormuz में बाधा के कारण तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। दक्षिण एशियाई देशों में ईंधन संकट का खतरा बढ़ा है। वैकल्पिक सप्लाई रूट खोजना मुश्किल हो रहा है। भारत, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, ने हालात से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में फिलहाल पेट्रोल-डीजल का स्टॉक पर्याप्त है और रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।
- रूस से लगभग 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा।
- ईरान के साथ जहाजों के सुरक्षित मार्ग पर बातचीत।
- 20 से ज्यादा टैंकरों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने की कोशिश।
- अमेरिका सहित कई देशों से LPG आयात शुरू।