Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 26 Feb, 2026 05:58 PM

हाल के दिनों में स्कूल की किताबों को लेकर बहस तेज हुई है। खासकर 8वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब के एक अध्याय पर Supreme Court of India की रोक के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर एनसीईआरटी की किताबें बनाता कौन है ...
नेशनल डेस्क: हाल के दिनों में स्कूल की किताबों को लेकर बहस तेज हुई है। खासकर 8वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब के एक अध्याय पर Supreme Court of India की रोक के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर एनसीईआरटी की किताबें बनाता कौन है और उनकी सामग्री को अंतिम मंजूरी कौन देता है।
NCERT क्या है और किसके अधीन काम करता है?
National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) एक स्वायत्त संस्था है, जो भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। देशभर के कई स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबें और सिलेबस तैयार करने की जिम्मेदारी इसी संस्था की होती है।
नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए एनसीईआरटी ने 2023 में एक 19 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई। इस समिति का नाम है National Syllabus and Teaching Learning Material Committee (NSTC)। यही कमेटी कक्षा 3 से 12 तक के नए सिलेबस और किताबों को तैयार करने का काम करती है। जरूरत पड़ने पर कक्षा 1 और 2 की किताबों में भी बदलाव इसी प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। इन किताबों को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे, यानी NCF-SE 2023, के अनुरूप बनाया जाता है ताकि पढ़ाई आधुनिक जरूरतों के मुताबिक हो।
कमेटी में कौन-कौन हैं शामिल?
इस 19 सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष हैं M. C. Pant, जो National Institute of Educational Planning and Administration से जुड़े रहे हैं। सह-अध्यक्ष हैं प्रसिद्ध गणितज्ञ Manjul Bhargava, जो Princeton University में प्रोफेसर हैं। कमेटी में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें Sudha Murty, Shankar Mahadevan, Sanjeev Sanyal, Shekhar Mande, Sujatha Ramdorai और Michel Danino जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा एनसीईआरटी के कई वरिष्ठ प्रोफेसर और विषय विशेषज्ञ भी इस प्रक्रिया में भाग लेते हैं। समिति के एक सदस्य Bibek Debroy का नवंबर 2024 में निधन हो चुका है।
कैसे तैयार होती हैं किताबें?
सबसे पहले कमेटी सिलेबस का ढांचा तय करती है। फिर अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ मिलकर ड्राफ्ट तैयार करते हैं। जरूरत पड़ने पर क्यूरिकुलम एडवाइजरी ग्रुप (CAG) भी बनाए जाते हैं, जिनमें और विशेषज्ञ जोड़े जा सकते हैं। ड्राफ्ट तैयार होने के बाद उसकी समीक्षा की जाती है। अंतिम मंजूरी मिलने पर एनसीईआरटी किताबों का प्रकाशन और वितरण करती है। एनसीईआरटी के डायरेक्टर Dinesh Prasad Saklani के अनुसार, पूरी टीम मिलकर काम करती है ताकि किताबें तथ्यात्मक, संतुलित और बच्चों के लिए उपयोगी हों।
क्यों अहम है यह प्रक्रिया?
एनसीईआरटी की किताबें देशभर के लाखों छात्रों के लिए आधार सामग्री होती हैं। इसलिए इनके कंटेंट को लेकर पारदर्शिता और विशेषज्ञों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसी भी बदलाव या विवाद के बाद यही कमेटी आगे की दिशा तय करती है और जरूरत पड़ने पर सामग्री में संशोधन किया जाता है।