नेपाल में कुदरत का कहर: आम के पेड़ को पकड़कर बची मजदूर की जान, विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही

Edited By Updated: 27 Aug, 2026 08:46 AM

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नेपाल  में अचानक आई कुदरती आपदा ने भीषण तबाही मचाई है। पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने बस्तियों और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया। इस आपदा में कम से कम 157 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी लापता हैं। चीन सीमा से सटे रसुवा जिले...

काठमांडू: नेपाल  में अचानक आई कुदरती आपदा ने भीषण तबाही मचाई है। पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने बस्तियों और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया। इस आपदा में कम से कम 157 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी लापता हैं। चीन सीमा से सटे रसुवा जिले के निचले इलाके बिदुर में काम कर रहे 24 वर्षीय नेपाली मजदूर बिबेक कुमाल की जान चमत्कारिक ढंग से बच गई। बिबेक एक नए मकान के बाहर शौचालय का गड्ढा खोद रहे थे, तभी पहाड़ी की तरफ से मलबे और पानी का तेज सैलाब आया... ऊपर खड़े साथियों के चिल्लाने पर बिबेक जब तक बाहर निकल पाते, तब तक बाढ़ उन्हें बहा ले गई। पानी का तेज बहाव बिबेक को कीचड़ और पत्थरों के साथ नीचे की ओर खींच रहा था। इसी दौरान वे किस्मत से रास्ते में पड़े एक आम के पेड़ से लिपट गए। बाद में पुलिस टीम ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। हादसे में उनके पैर में चोट आई है।

 
काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में अपने बिस्तर पर लेटे हुए कुमाल ने बताया, मैं भागने लगा। तभी पानी की एक तेज़ लहर ऐसे आई जैसे भूकंप आ गया हो।" उनके भाई दिनेश उनके पास बैठे थे। पानी का तेज़ बहाव उन्हें कीचड़ और मलबे के साथ नीचे की ओर बहा ले गया, लेकिन उन्होंने कहा, किस्मत से मैं आम के पेड़ पर अटक गया। अगर आम का पेड़ न होता, तो मैं बहकर मर जाता।

नेपाल की इस सबसे बड़ी आपदाओं में से एक में अचानक आई बाढ़ से कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग, जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं, लापता हैं।  अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अब तक 114 से ज़्यादा लोगों को बचाया है और उनका इलाज काठमांडू और रसुवा के अलग-अलग अस्पतालों में किया जा रहा है।
 
आपदा का शिकार केवल बिबेक ही नहीं हुए। अस्पताल में भर्ती 11 वर्षीय रिहाना लामिछाने ने बताया कि मैं स्कूल में थी। इसकी वजह से स्कूल बंद कर दिया गया और हमें घर जाने के लिए कहा गया। जब मैं नदी पार कर रही थी, तो अचानक बाढ़ का पानी तेज़ी से बहने लगा। उनकी छाती और पैर में चोट आई, लेकिन उन्होंने कहा, मैं सुरक्षित हूँ, इसलिए खुश हूं। मुझे नहीं पता कि मेरे दोस्तों के साथ क्या हुआ। 
 

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