ओम बिरला पर अविश्वास प्रस्ताव और खाली डिप्टी स्पीकर पद, अब कौन चलाएगा सदन?

Edited By Updated: 11 Feb, 2026 12:53 PM

no confidence motion against speaker who will lead lok sabha now

भारतीय संसद में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जारी किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 179(c) और लोकसभा के नियम 94(c) के तहत यह प्रक्रिया शुरू की गई है। लेकिन पेंच यह है कि सदन में वर्तमान में कोई डिप्टी स्पीकर (उपाध्यक्ष) नहीं है,...

No Confidence motion against Speaker: भारतीय संसद में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जारी किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 179(c) और लोकसभा के नियम 94(c) के तहत यह प्रक्रिया शुरू की गई है। लेकिन पेंच यह है कि सदन में वर्तमान में कोई डिप्टी स्पीकर (उपाध्यक्ष) नहीं है, जो स्पीकर की जगह ले सके।

क्यों सदन की कुर्सी पर नहीं बैठ पाएंगे ओम बिरला?

संविधान के अनुच्छेद 96(1) के अनुसार, जब स्पीकर को पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो वे सदन में मौजूद तो रह सकते हैं, लेकिन अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्हें सदन में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार होता है, लेकिन मतदान के समय वे केवल पहली बार में वोट दे सकते हैं, 'कास्टिंग वोट' (बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट) नहीं।

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कौन बैठेगा डिप्टी स्पीकर की कुर्सी पर?

सामान्यतः स्पीकर की अनुपस्थिति में डिप्टी स्पीकर कार्यभार संभालते हैं। चूंकि 18वीं लोकसभा में अभी तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए यह स्थिति और जटिल हो गई है। ऐसी स्थिति में दो मुख्य रास्ते बचते हैं:

चेयरपर्सन्स का पैनल (Panel of Chairpersons): लोकसभा के नियम 9 के तहत अध्यक्ष 10 सदस्यों का एक पैनल नामित करते हैं। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति में इस पैनल का कोई भी सदस्य सदन की अध्यक्षता कर सकता है। हालांकि, अविश्वास प्रस्ताव जैसे गंभीर मामले में यह स्थायी समाधान नहीं माना जाता।

राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति (Article 95(2)): यदि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों के पद रिक्त हों या वे कार्य करने में असमर्थ हों, तो भारत के राष्ट्रपति सदन के किसी भी सदस्य को अध्यक्ष के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त कर सकते हैं। इसे अक्सर 'अस्थायी अध्यक्ष' के रूप में देखा जाता है।

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 'पैनल ऑफ चेयरपर्सन्स' की भूमिका

वर्तमान में लोकसभा में वरिष्ठ सांसदों का एक पैनल मौजूद है। जब तक राष्ट्रपति किसी एक नाम पर मुहर नहीं लगाते, तब तक इस पैनल के सदस्य बारी-बारी से सदन की कार्यवाही चलाएंगे। इनके पास वे सभी शक्तियां होती हैं जो एक स्पीकर के पास होती हैं, जैसे

  • सदन में व्यवस्था बनाए रखना।
  • सांसदों को बोलने की अनुमति देना।
  • नियमों के तहत मतदान कराना।

 

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