श्रीलंका में खूनी अध्याय फिर चर्चा में: 2022 हिंसा केस में 16 दोषी करार, 12 प्रदर्शनकारियों को फांसी

Edited By Updated: 11 Feb, 2026 02:34 PM

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श्रीलंका की एक अदालत ने 2022 के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्तारूढ़ दल के सांसद और उनके सुरक्षा अधिकारी की हत्या के मामले में 16 दोषियों को सजा सुनाई है। इनमें से 12 को मृत्युदंड दिया गया है। मामला देश के राजनीतिक उथल-पुथल से जुड़ा है।

Colombo: श्रीलंका की पश्चिमी प्रांत की एक उच्च अदालत ने वर्ष 2022 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्तारूढ़ दल के एक सांसद और उनके सुरक्षा अधिकारी की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में आरोपित 41 लोगों में से 16 को दोषी ठहराया है। गंपाहा शहर की हाई कोर्ट की तीन-सदस्यीय पीठ ने विभाजित फैसले में 12 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई, जबकि चार अन्य आरोपियों को निलंबित कारावास दिया गया है।यह मामला 9 मई 2022 का है, जब तत्कालीन सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (SLPP) पार्टी के सांसद अमरकीर्ति अथुकोरले और उनके सुरक्षा अधिकारी जयंथा गुणवर्धना की भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

 

जब सांसद अपने वाहन से उत्तरी-मध्य क्षेत्र पोलोन्नरुवा स्थित अपने निर्वाचन क्षेत्र की ओर जा रहे थे, तभी रास्ते में भीड़ ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और दोनों की पीट-पीटकर हत्या कर दी। उसी दिन देश भर में हालात बेकाबू हो गए थे। तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कथित तौर पर सत्तारूढ़ दल से जुड़े समूहों ने हमला किया था। इसके बाद विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए और जवाबी कार्रवाई में सत्तारूढ़ दल के समर्थकों के घरों को निशाना बनाया गया। 

 

रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा में लगभग 100 सत्तारूढ़ नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया गया था। देश उस समय अपने सबसे भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा था। व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दबाव में राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को दो महीने बाद पद छोड़ना पड़ा।  इसके बाद भारत से मिली आपात आर्थिक सहायता और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बेलआउट पैकेज से देश में धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए। 2022 में जब श्रीलंका अभूतपूर्व आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब भारत पहला देश था जिसने खुलकर मदद का हाथ बढ़ाया।

 

  • भारत ने लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता दी
  • ईंधन, खाद्यान्न, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की
  • RBI और EXIM बैंक के ज़रिए क्रेडिट लाइन दी
  • कूटनीतिक स्तर पर IMF से राहत पैकेज की राह आसान की
  • विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत की समय पर मदद नहीं मिलती, तो हालात गृहयुद्ध जैसे हो सकते थे।

 

 

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