भारत की ‘ऐक्ट ईस्ट', ‘पड़ोस प्रथम' नीतियों का दक्षिण एशिया के बाहर भी प्रभाव: जयशंकर

Edited By Updated: 28 May, 2022 04:15 PM

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि ''ऐक्ट ईस्ट'' और ''पड़ोस प्रथम'' नीतियों के एक साथ आने से भारत के लिए दक्षिण एशिया की सीमाओं से परे भी व्यापक प्रभाव होगा। जयशंकर ने यहां ‘नैचुरल एलाइज इन डेवलपमेंट एंड इंटरडिपेंडेंस (एनएडीआई)'' सम्मेलन को...

गुवाहाटी: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि 'ऐक्ट ईस्ट' और 'पड़ोस प्रथम' नीतियों के एक साथ आने से भारत के लिए दक्षिण एशिया की सीमाओं से परे भी व्यापक प्रभाव होगा। जयशंकर ने यहां ‘नैचुरल एलाइज इन डेवलपमेंट एंड इंटरडिपेंडेंस (एनएडीआई)' सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इसका अहसास बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बिम्सटेक की क्षमता से स्पष्ट है। 

उन्होंने कहा कि म्यांमा के माध्यम से भूमि संपर्क और बांग्लादेश के माध्यम से समुद्री संपर्क वियतनाम तथा फिलीपीन के लिए सभी रास्ते खोल देगा। विदेश मंत्री ने कहा कि एक बार जब यह वाणिज्यिक स्तर पर व्यवहार्य हो जाएगा तो यह महाद्वीप के लिए व्यापक परिणामों के साथ एक पूर्व-पश्चिम पहलू का निर्माण करेगा।  उन्होंने कहा कि यह न केवल आसियान देशों और जापान के साथ साझेदारी निर्माण करेगा, बल्कि निर्माणाधीन हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचा में भी वास्तव में फर्क लाएगा। 

जयशंकर ने कहा कि यदि हम राजनीति और अर्थशास्त्र को सही कर सके तो यह निश्चित रूप से भूगोल पर जीत पाने और इतिहास को फिर से लिखने की हमारी क्षमता के दायरे में है। उन्होंने कहा कि आसियान देशों और उससे आगे तक पहुंच में सुधार के लिए बांग्लादेश, नेपाल, भूटान तथा म्यांमा के साथ संपर्क बढ़ाकर इस दृष्टिकोण को सफलतापूर्वक साकार किया जा सकता है।  

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