Edited By Parveen Kumar,Updated: 24 Apr, 2026 08:49 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न के अनुरूप, सहकारिता मंत्रालय देशभर में क्षेत्रीय कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित कर रहा है, ताकि सहकारी क्षेत्र में परिवर्तनकारी...
नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न के अनुरूप, सहकारिता मंत्रालय देशभर में क्षेत्रीय कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित कर रहा है, ताकि सहकारी क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधारों को गति दी जा सके। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक अनाज भंडारण सुविधाओं को किसानों के निकटतम स्तर तक पहुंचाना, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के नेटवर्क को सशक्त एवं विस्तारित करना, सहकारी गतिविधियों में विविधता लाना तथा सहकारी संस्थाओं के सदस्यों एवं लाभार्थियों के कल्याण हेतु ‘सहकारिता में सहकार’ को बढ़ावा देना है।
इसी राष्ट्रव्यापी पहल के अंतर्गत “सहकार से समृद्धि” विषय पर प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला आज जयपुर, राजस्थान में आयोजित की गई, जिसमें भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं तथा विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह कार्यशाला नीतिगत समीक्षा, प्रगति आकलन, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा जमीनी स्तर पर सहकारी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु समयबद्ध कार्ययोजनाओं की तैयारी के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में आयोजित की गई।
यह कार्यशाला प्रमुख सहकारी पहलों की प्रगति की समीक्षा, क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा तथा PACS, डेयरी सहकारी संस्थाओं, मत्स्य सहकारी संस्थाओं एवं देशभर में भंडारण अवसंरचना की पहुँच और कार्यक्षमता बढ़ाने हेतु व्यावहारिक रणनीतियों को अंतिम रूप देने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई।
उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन के पश्चात नाबार्ड के अध्यक्ष, सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव तथा सहकारिता मंत्रालय के सचिव द्वारा संबोधन दिया गया। विचार-विमर्श में सहकारी क्षेत्र को ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन तथा समावेशी आर्थिक विकास के प्रमुख आधार के रूप में सशक्त बनाने पर बल दिया गया।
कार्यशाला के एक प्रमुख सत्र में सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना (WLGSP) की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें ऋण स्वीकृति प्रक्रियाओं की निगरानी, कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) के अंतर्गत क्रियान्वयन, PACS की पहचान, भूमि चयन, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) की तैयारी तथा संचालन समन्वय पर चर्चा हुई। राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने सितंबर 2026 और सितंबर 2027 तक अनाज भंडारण लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु अपनी कार्ययोजनाएँ भी प्रस्तुत कीं।
FCI, NAFED, NCCF, CWC तथा SWC के प्रतिनिधियों ने गोदाम विकास की प्रगति पर प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें स्थान चयन, जिला-वार आवश्यकताएँ, किराया तंत्र, संकेतात्मक दरें तथा भंडारण अवसंरचना के संचालन की योजनाएँ शामिल थीं।
कार्यशाला में WDRA रूपरेखा पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें PACS को वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी के अंतर्गत जोड़ने की प्रक्रिया, सरलीकृत प्रक्रियाएँ, पात्रता मानदंड, प्रशिक्षण सहयोग तथा सहकारी संस्थाओं को उपलब्ध लाभों की जानकारी दी गई।
एक अन्य प्रमुख विषय, वर्ष 2026–27 हेतु बहुउद्देशीय PACS (M-PACS) के गठन एवं सुदृढ़ीकरण का रहा। राज्यों ने नए गठन, पंजीकरण, संबद्धता एवं व्यवसाय विकास हेतु जिला-वार लक्ष्य साझा किए। ऋण गतिविधियों का विस्तार, जमा राशि में वृद्धि, व्यवसायों में विविधता तथा सुनियोजित हस्तक्षेपों के माध्यम से PACS की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हेतु रणनीतियों पर चर्चा की गई।
डेयरी एवं मत्स्य सहकारी संस्थाओं पर आयोजित सत्रों में मौजूदा संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, सदस्यता वृद्धि, उत्पादकता बढ़ाने, खरीद प्रणाली को मजबूत करने तथा टिकाऊ मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। कमजोर सहकारी संस्थाओं के पुनर्जीवन तथा संस्थागत वित्तीय प्रणालियों से उनके एकीकरण पर भी चर्चा हुई।
सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र को आधुनिकीकरण, पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन तथा राज्यों एवं जमीनी संस्थाओं की सशक्त भागीदारी के माध्यम से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जयपुर कार्यशाला से सहकारी सुधारों के क्रियान्वयन को और गति मिलने तथा “सहकार से समृद्धि” के विज़न को सार्थक रूप से आगे बढ़ाने की अपेक्षा है।