PM मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच हुई खास मुलाकात, दोनों ने मिलकर लगाया पौधा, देखें  तस्वीरें

Edited By Updated: 20 Apr, 2026 12:51 PM

a special meeting between pm modi and south korean president lee jae myung

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच आज दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच Special Strategic Partnership को और मजबूती प्रदान की है।

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच आज दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच Special Strategic Partnership को और मजबूती प्रदान की है।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली ने मिलकर लगाया पौधा

बैठक के दौरान एक बेहद खास पल तब आया जब पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली ने एक साथ मिलकर पौधा लगाया। यह कदम पीएम मोदी की वैश्विक पहल 'एक पेड़ मां के नाम' के प्रति एकजुटता और पर्यावरण संरक्षण के साझा संकल्प को दर्शाता है।

राजघाट पर श्रद्धांजलि और राष्ट्रपति भवन में स्वागत

इससे पहले दिन की शुरुआत में, राष्ट्रपति ली और उनकी पत्नी किम ही-क्युन ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने दोनों देशों के झंडे लहराकर मेहमानों का स्वागत किया।

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ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर हुई चर्चा

एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ली ने मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि और समुद्री व्यापार मार्गों के बाधित होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, इसलिए Strait of Hormuz जैसे रणनीतिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दोनों राष्ट्रों के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।

इन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग

शिखर वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • महत्वपूर्ण खनिज: कच्चे माल के आयात से आगे बढ़कर दक्षिण कोरियाई तकनीक और भारतीय खनन उद्योग के बीच तालमेल।

  • रणनीतिक क्षेत्र: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा, सेमीकंडक्टर्स और शिपबिल्डिंग।

  • व्यापार और निवेश: आपसी आर्थिक संबंधों को नई गति देना।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के प्राचीन सभ्यतागत संबंधों और लोकतांत्रिक मूल्यों को और गहरा करने की दिशा में एक 'मील का पत्थर' साबित होगी।

 

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