Edited By Tanuja,Updated: 21 Jul, 2026 04:02 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एनएसए अजीत डोभाल ने सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से मुलाकात की। दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। भारत खाड़ी क्षेत्र में अपने रणनीतिक और कूटनीतिक संपर्क...
International Desk: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने सऊदी अरब की यात्रा के दौरान विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है।सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, रियाद में हुई बैठक में भारत और सऊदी अरब के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
दोनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बैठक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। हाल ही में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की है। उन्होंने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी जहाजों को रोकने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है। सऊदी अरब ने इस धमकी को खारिज करते हुए कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने जहाजों और समुद्री हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। डोभाल की इस साल यह तीसरी सऊदी यात्रा है।
इससे पहले वह फरवरी और अप्रैल में भी रियाद गए थे, जहां उन्होंने सऊदी नेतृत्व के साथ ऊर्जा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। भारत और सऊदी अरब के बीच मजबूत आर्थिक और ऊर्जा संबंध हैं। सऊदी अरब भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। इसके अलावा लगभग 26 लाख भारतीय नागरिक सऊदी अरब में रहते और काम करते हैं, जो वहां का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है।मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच भारत का फोकस ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की रक्षा करने और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।